पचपेड़वा वन क्षेत्र में अवैध कटान का बड़ा खेल, जिम्मेदारियों पर उठे गंभीर सवाल

पचपेड़वा वन क्षेत्र में अवैध कटान का बड़ा खेल, जिम्मेदारियों पर उठे गंभीर सवाल

निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेड़वा (बलरामपुर )वन क्षेत्र अंतर्गत बीरपुर रंगएरी और बेलभरिया बीट में जंगल की लकड़ी के बड़े पैमाने पर अवैध कटान का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार ठेकेदारों द्वारा सुनियोजित तरीके से जंगल की हरियाली को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। इस पूरे मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भेलभरिया क्षेत्र में बिना परमिट के पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं है। रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों के जरिए लकड़ी को जंगल से बाहर भेजा जाता है, जिससे प्रशासन की निष्क्रियता साफ झलकती है। एक मामले में संवाददाता की नजर रात के समय लकड़ी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पर पड़ी। तत्पश्चात बलरामपुर के संबंधित वन अधिकारियों को दूरभाष के माध्यम से सूचना दी गई। सूचना मिलने के बाद वनरक्षक कर्मियों को मौके पर भेजा गया और लकड़ी को कब्जे में लिया गया। लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई ठोस और पारदर्शी जानकारी सामने नहीं आ सकी है। जब इस संबंध में रेंजर योगेश सिंह से दूरभाष पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि लकड़ी को सीज कर दिया गया है, लेकिन विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं मामले को दबाने की कोशिश तो नहीं की जा रही। वहीं, जब बेलभरिया बीट में अवैध कटान को लेकर सवाल किया गया, तो संबंधित अधिकारियों का जवाब भी संतोषजनक नहीं रहा। उल्टा उन्होंने आम नागरिकों के अधिकारों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विभाग के कुछ जिम्मेदार लोग अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रहे हैं। इन तमाम घटनाओं से यह साफ संकेत मिल रहा है कि पचपेड़वा वन क्षेत्र में अवैध कटान का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसमें कुछ वनकर्मी और ठेकेदारों की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बिना परमिट के पेड़ों की कटाई और लकड़ी की तस्करी खुलेआम जारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। अगर समय रहते इस गंभीर मुद्दे पर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले समय में जंगल पूरी तरह से उजड़ सकते हैं। साथ ही, पर्यावरण संतुलन पर भी इसका गंभीर असर पड़ेगा। ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला प्रशासन और वन विभाग की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा है। यदि जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह लापरवाही बरतते रहे, तो अवैध कटान का यह खेल लगातार जारी रहेगा और जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।