मनु-सतरूपा की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
निष्पक्ष जन अवलोकन विनय सिंह मसौली (बाराबंकी)। ग्राम पंचायत बड़ागांव के मोहल्ला नालीपार स्थित मंदिर पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक उमेश महाराज ने मनु-सतरूपा की प्रेरणादायक कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथावाचक ने बताया कि मनु और सतरूपा से ही मानव सृष्टि की उत्पत्ति हुई। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक राज्य संचालन के बाद जब मनु को बुढ़ापे का आभास हुआ तो उन्हें इस बात की चिंता हुई कि उनका जीवन बिना हरि भक्ति के ही बीत गया। इसके बाद उन्होंने अपना राज्य पुत्र उत्तानपाद को सौंप दिया और पत्नी सतरूपा के साथ नैमिषारण्य तीर्थ की ओर प्रस्थान किया। कथा के अनुसार, प्रभु के दर्शन की तीव्र इच्छा लेकर दोनों ने कठोर तपस्या की। छह हजार वर्षों तक उन्होंने जल का त्याग कर केवल वायु पर जीवन यापन किया और दस हजार वर्ष बीतने पर वायु का भी त्याग कर दिया। एक पैर पर खड़े होकर की गई उनकी अटूट तपस्या से ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी प्रभावित हुए, लेकिन तमाम परीक्षाओं और प्रलोभनों के बावजूद मनु-सतरूपा विचलित नहीं हुए। अंततः उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान प्रकट हुए और वर मांगने को कहा। इस पर मनु ने प्रभु से उनके दिव्य स्वरूप के दर्शन की इच्छा जताई। भगवान के साक्षात दर्शन पाकर दोनों प्रभु के चरणों में लिपट गए और उनके समान पुत्र की कामना की। भगवान ने उन्हें वरदान दिया कि वे स्वयं उनके पुत्र के रूप में अवतार लेंगे। इस अवसर पर श्रीमती पुष्पा, श्रवण कुमार कश्यप, कृष्ण कुमार कश्यप, सुनील चौहान, देधराम यादव, काशीराम वर्मा, मास्टर सुरजन यादव, अरुण कुमार नाग, नरेंद्र चौहान, दिलीप कुमार वर्मा, लल्लू यादव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।









