पाठा क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर अनशन का नौवां दिन, विधायक अनिल प्रधान का मिला समर्थन

पाठा क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर अनशन का नौवां दिन, विधायक अनिल प्रधान का मिला समर्थन

निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट।बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में पाठा क्षेत्र की मूलभूत जनसमस्याओं को लेकर शहीद स्मारक पार्क, एलआईसी तिराहा कर्वी में चल रहा क्रमिक अनशन मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। खराब मौसम—आंधी, बारिश और तूफान—के बावजूद आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। अनशन के नौवें दिन सदर विधायक अनिल प्रधान ने मौके पर पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि जब तक क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक आंदोलनकारियों का संघर्ष जारी रहेगा और वे भी उनके साथ खड़े हैं। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि मांगें पूरी होने तक घर वापसी नहीं होगी। इस दौरान अधिवक्ता प्रखर पटेल, समाजसेवी मुकेश कुमार, विपिन, राहुल, संदीप, संजय राणा, जयकरन, हनुमान, अनिल, प्रकाश वर्मा, कुलदीप सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं: देवांगना घाटी से ददरी-मारकुंडी संपर्क मार्ग का चौड़ीकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रुकमा खुर्द में एंबुलेंस व पर्याप्त स्टाफ की तैनाती रुकमा बुजुर्ग में बने पुस्तकालय का संचालन तथा अन्य ग्राम पंचायतों में पुस्तकालय निर्माण रुकमा खुर्द, मारकुंडी व सरैंया में खेलो इंडिया के तहत स्टेडियम निर्माण क्षेत्र में डिग्री कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज व बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना पशु अस्पताल रुकमा बुजुर्ग में पेयजल, रास्ता व डॉक्टरों की व्यवस्था विद्युत कटौती व लो वोल्टेज की समस्या का समाधान हर घर जल योजना का शीघ्र क्रियान्वयन तालाबों का सौंदर्यीकरण व सड़कों का मरम्मतीकरण कर्वी से मारकुंडी तक सरकारी बस सेवा शुरू करना माडो बांध के गेट की मरम्मत व नहर की खुदाई प्रत्येक ग्राम पंचायत में श्मशान घाट का निर्माण ददरी माफी में पुलिस चौकी की स्थापना बहिलपुरवा व मारकुंडी रेलवे स्टेशनों पर फ्लाईओवर/अंडरपास की व्यवस्था पलायन रोकने के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराना विद्यालयों में आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा रुकमा खुर्द न्याय पंचायत को कर्वी तहसील में शामिल करना कर्वी में ऑटो रिक्शा स्टैंड का निर्माण आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से उपेक्षित इन मांगों के समाधान के लिए कई बार प्रशासन को ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में मजबूर होकर उन्हें अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा है।