फर्जी मनरेगा से गरीबों के हक पर डाका, फोटो खींचकर भर दी जा रही हाजिर

फर्जी मनरेगा से गरीबों के हक पर डाका, फोटो खींचकर भर दी जा रही हाजिर

निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेडवा विकास खंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत गोबरी में चल रहे नाला खुदाई कार्य में बड़े पैमाने पर फर्जी मनरेगा संचालन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव में 12 मास्टर रोल पर 76 मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जबकि मौके पर इतने मजदूर काम करते दिखाई नहीं देते। आरोप है कि सुबह-सुबह मजदूरों को बुलाकर केवल फोटो खींची जाती है और ऑनलाइन अटेंडेंस लगाकर अधिकतर मजदूरों को वापस भेज दिया जाता है, उसके बाद कुछ चुनिंदा लोगों से ही पूरा कार्य कराया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना गरीब मजदूरों को रोजगार देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन ग्राम पंचायत में इस योजना को भ्रष्टाचार का जरिया बना दिया गया है। जिन गरीब परिवारों को मजदूरी का लाभ मिलना चाहिए, उनका हक कागजों और ऑनलाइन फर्जी उपस्थिति के जरिए छीना जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कई ऐसे लोगों के नाम भी मास्टर रोल में दर्ज हैं जो मौके पर काम करते दिखाई नहीं देते। इसके बावजूद उनके नाम से भुगतान निकलने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, नाला खुदाई कार्य में प्रतिदिन यही खेल दोहराया जाता है। सुबह मजदूरों की लाइन लगवाकर फोटो खींची जाती है ताकि ऑनलाइन सिस्टम में उपस्थिति दर्ज हो सके। इसके बाद मजदूरों को यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि आज काम कम है। कुछ ही मजदूरों से पूरे दिन कार्य कराया जाता है, जबकि बाकी लोगों की हाजिरी ऑनलाइन चलती रहती है। ग्रामीणों ने इसे गरीबों के रोजगार पर सीधा हमला बताया है। गांव के लोगों का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी आंखें बंद किए बैठे हैं। मनरेगा में पारदर्शिता का दावा करने वाले अधिकारी आखिरकार मौके पर जाकर वास्तविक मजदूरों की गिनती क्यों नहीं करते, यह सवाल ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गरीब मजदूरों को पूरे दिन की मजदूरी का लालच देकर बुलाया जाता है, लेकिन कुछ देर बाद वापस कर दिया जाता है। इससे गरीब परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। जिन लोगों के घर चूल्हा मजदूरी से जलता है, उन्हीं का हक फर्जी उपस्थिति के जरिए दबाया जा रहा है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि मनरेगा योजना का उद्देश्य गांव में बेरोजगार लोगों को काम देकर आर्थिक सहारा देना था, लेकिन अब यह योजना भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गोबरी ग्राम पंचायत में चल रहे नाला खुदाई कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए। मौके पर उपस्थित वास्तविक मजदूरों का सत्यापन किया जाए तथा फर्जी तरीके से ऑनलाइन हाजिरी लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते जांच नहीं हुई तो गरीब मजदूरों का हक इसी तरह लूटा जाता रहेगा और सरकारी धन का बंदरबांट होता रहेगा।