उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को पत्रक सौंपा

उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को पत्रक सौंपा

निष्पक्ष जन अवलोकन

प्रमोद सिन्हा

गाज़ीपुर उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन के अध्यक्ष असित कुमार सेठ एवं महामंत्री सुरेंद्र कुमार सिंह ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से मिलकर राज्यपाल से सम्बंधित पत्रक सौपते हुए बताया की उत्तर प्रदेश व्यापार संगठन नारी सशक्तिकरण, समानता, न्याय एवं मानवाधिकारों के प्रति अपनी अटूट आस्था और प्रतिबद्धता को दृढतापूर्वक व्यक्त करता है। हमारे देश की आधी आबादी महिलाए, लंबे समय से सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में अनेक प्रकार की असमानताओं और चुनौतियों का सामना करती रही हैं। ऐसे में वर्तमान सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लागू करने के लिए लाया गया ‘महिला आरक्षण बिल-2026’ एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आया, जिसका उद्देश्य लोकसभा एवं राज्यों की विधान सभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दिलाना था। इस अधिनियम के लागू हो जाने से देश की महिलाओं की आवाज पूरे देश में पहुंचती और विधि निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत होती। नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक सशक्त माध्यम है। यह अधिनियम महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा तथा निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त होता है। किन्तु अत्यंत खेद के साथ यह देखा गया है कि इंडी गठबंधन (कांग्रेस, सपा, टी०एम०सी०, आर० जे०डी०, डी०एम०के०) के द्वारा इस अत्यंत महत्वपूर्ण अधिनियम का विरोध किया गया। उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन, विपक्ष के इस विरोध को न केवल अनुचित, बल्कि समाज के समग्र विकास के प्रति बाधक और महिलाओं के अधिकारों एवं सम्मान के प्रति असंवेदनशील मानती है। विपक्ष हमेशा से ही अपने भदवे बयानों से देश की महिलाओं का अपमान करता आया है। विपक्ष का यह रुख दर्शाता है कि वे महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को भी राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहे है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन यह स्पष्ट करना चाहता है कि महिलाओं के अधिकारों का प्रश्न किसी एक दल या विचारधारा का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे राष्ट्र के विकास और प्रगति से जुड़ा हुआ मुद्दा है। जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी समाज और राष्ट्र सशक्त होगा। अतः इस प्रकार के सकारात्मक और प्रगतिशील कदमों का समर्थन करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि और नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए। ऐसे में विपक्षी दलों का भारतीय संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध करना, उनकी महिला विरोधी संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। अतः हमारा संगठन विपक्ष द्वारा नारी शक्ति अधिनियम के विरोध की कड़े शब्दों में निंदा करता है। साथ ही, उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन केंद्र एवं राज्य सरकारों से भी आग्रह करता है कि इस अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने हेतु आवश्यक संसाधन, जागरूकता अभियान एवं निगरानी तंत्र सुनिश्चित किए जाएं। अंत मे व्यापार संगठन ने राज्यपाल से सम्बंधित निंदा प्रस्ताव जिला अधिकारी को दिया l