मिश्रौलिया बनकटवा ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का तांडव, खबर छापने पर जान से मारने की धमकी! प्रशासन बना मूकदर्शक
निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेडवा विकासखंड अंतर्गत जनपद बलरामपुर की ग्राम पंचायत मिश्रौलिया में भ्रष्टाचार खुलेआम अपने चरम पर है। सरकारी योजनाओं की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। निष्पक्ष जन अवलोकन द्वारा 16 नवंबर, 30 नवंबर और 3 फरवरी को लगातार भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरें प्रकाशित की गईं, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार, पंचायत में हो रहे अनियमित कार्यों के पीछे वीडियो मोहित दुबे की अहम भूमिका बताई जा रही है, जिनकी कथित मिलीभगत से पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर कार्य कराए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने जिले से आए अधिकारियों के समक्ष शिकायतें दर्ज कराईं, मगर जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाकर अधिकारी वापस लौट गए, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थिति यह है कि पंचायत का सामुदायिक शौचालय बंद होने की कगार पर है, जिससे ग्रामीण खुले में शौच करने को मजबूर हैं। वहीं पंचायत भवन निर्माण में पुरानी ईंटों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि सेक्रेटरी संदीप, प्रधान महेंद्र कुमार और टी. धर्मेंद्र पांडे की मिलीभगत से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जब निर्माण लागत और कार्य विवरण की जानकारी मांगी गई तो सचिव संदीप ने साफ शब्दों में जानकारी देने से इनकार कर दिया। सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब खबर प्रकाशित होने के बाद संवाददाता महेंद्र कुमार यादव को प्रधान महेंद्र कुमार द्वारा दूरभाष पर जान से मारने की धमकी दी गई। कथित रूप से कहा गया— “खबर छापनी है तो छापो, लेकिन जिस दिन मिल गए, उस दिन तुम्हारा अंत होगा, सुबह का सूरज नहीं देख पाओगे।” यह धमकी न सिर्फ एक पत्रकार की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान को खुला संरक्षण प्राप्त है, इसी कारण वह घमंड में ऐसी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन भ्रष्टाचार और धमकियों के आगे झुक जाएगा? या फिर दोषियों पर कार्रवाई होगी? सीडीओ द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन जरूर दिया गया है, लेकिन जमीन पर अब तक कुछ नजर नहीं आ रहा। निष्पक्ष जन अवलोकन स्पष्ट करता है कि जब तक भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सच्चाई की आवाज यूं ही उठती रहेगी।