प्रधानमंत्री मोदी से अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने की कड़ी मांग, अन्यथा देशव्यापी, व्यापक और एकजुट जनआंदोलन की चेतावनी.. रूद्र प्रसाद मिश्र

प्रधानमंत्री मोदी से अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने की कड़ी मांग, अन्यथा देशव्यापी, व्यापक और एकजुट जनआंदोलन की चेतावनी.. रूद्र प्रसाद मिश्र

निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट।अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा – आरएसएस-भाजपा सरकार की पूर्ण आत्मसमर्पण की नीति। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के तत्काल इस्तीफ़े की मांग प्रधानमंत्री मोदी से अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने की कड़ी मांग, अन्यथा देशव्यापी, व्यापक और एकजुट जनआंदोलन की चेतावनी.. रूद्र प्रसाद मिश्र सभी राजनीतिक दलों तथा जन-आधारित और वर्ग-आधारित आंदोलनों से अपील कि वे सरकार द्वारा भारतीय किसानों और कृषि को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले करने की साज़िश को रोकने के लिए एकजुट हों.... रूद्र प्रसाद मिश्र उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष कामरेड रूद्र प्रसाद मिश्र ने अमेरिका भारत व्यापार समझौते की प्रतियाँ जलाते हुए किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अमेरिका-भारत व्यापार पर अंतरिम समझौते के ढांचे में उल्लिखित प्रमुख शर्तें आरएसएस-भाजपा नेतृत्व वाली नरेंद्र मोदी सरकार, जो पहले ही इस ढांचे का स्वागत कर चुकी है, द्वारा अमेरिकी कृषि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने किए गए पूर्ण आत्मसमर्पण को उजागर करती हैं। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा जारी ढांचे के अनुसार, भारत “अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा। इसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (डीडीजी), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।”उन्होंने कहा कि यह अंतरिम समझौते का ढांचा वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के दावे का पूर्ण खंडन है कि कृषि और डेयरी क्षेत्र मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से बाहर हैं और सरकार किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया डेयरी उत्पाद पहले ही यूके, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौतों का हिस्सा हैं और ताज़ा खुलासों ने यह निर्विवाद रूप से सिद्ध कर दिया है कि वाणिज्य मंत्री जानबूझकर झूठ का प्रचार कर रहे हैं और किसानों तथा पूरे देश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा वाणिज्य मंत्री की भूमिका को गद्दारी मानता है और उनके तत्काल इस्तीफ़े की मांग करता है। साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा प्रधानमंत्री से भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने की मांग करता है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें देशव्यापी, व्यापक और एकजुट जनआंदोलनों का सामना करना होगा। कामरेड मिश्र ने कहा कि अमेरिका द्वारा 18% शुल्क और भारत द्वारा शून्य शुल्क मुक्त व्यापार नहीं है। भारतीय वस्तुओं पर शुल्क वास्तव में 2023-24 में शून्य से बढ़कर 3% और फिर 18% हो गया है, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर हमारे शुल्क, जो 30% से 150% तक थे, अब शून्य कर दिए गए हैं। इससे भारतीय कृषि अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के फंदे में फंस जाएगी। अंतरिम समझौते के ढांचे के अनुसार गैर-शुल्क बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जिससे अमेरिका से दूध का आयात आसान होगा। आरएसएस यह दावा करता रहा है कि मांसाहार से पोषित पशुओं का दूध आयात नहीं होगा — यह एक गैर-शुल्क बाधा थी। अब डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में आरएसएस को अपनी ही बात निगलनी पड़ी है और वे पूरी तरह नतमस्तक गए हैं।उन्होंने बताया किभारत सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मक्का को ड्राइड डिस्टिल्ड ग्रेन (DDB) के रूप में तथा ज्वार के साथ पशु आहार के तौर पर बेचा जाएगा। इससे पशु आहार बाज़ार पर अमेरिकी कंपनियों का पूर्ण एकाधिकार स्थापित हो जाएगा। अमेरिका पहले से ही मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलें भारत को निर्यात कर रहा है और अमेरिकी गेहूं ₹18.50 प्रति किलोग्राम की दर से निर्यात किया जा रहा है; यदि इसे भारतीय बाज़ारों में खुलकर आने दिया गया तो यह भारतीय किसानों को तबाह कर देगा। जीएम खाद्य पदार्थों और जीएम बीजों के आयात को खुली छूट दी जाएगी, जो हमारी प्राकृतिक उर्वरता को नष्ट करेगी और अनाज, दलहन तथा तिलहन बाज़ारों को भी नुकसान पहुंचाएगी। सोयाबीन तेल आयात के निशाने पर है। एथनॉल का भी मुक्त आयात होगा। सेब, अनानास, नारियल जैसे ताजे फलों तथा काजू सहित सूखे मेवों का आयात जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को बर्बाद कर देगा।उन्होंने कहा किभारतीय उद्योग, कृषि और डेयरी क्षेत्र सस्ते आयात के गंभीर ख़तरे में हैं। 1 फ़रवरी को प्रस्तुत केंद्रीय बजट पहले ही कृषि विकास (3.1%) और रोज़गार सृजन में गिरावट को उजागर कर चुका है, और सरकार के पास विकास की कमी से निपटने के लिए कोई प्रस्ताव/सुझाव नहीं है। न्यूनतम समर्थन मूल्य निरंतर A2 लागत से भी नीचे है, बाज़ार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हैं, यूरिया और DAP की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं, और किसान कर्ज़ बढ़ता जा रहा है। सामाजिक व्यय में हर तरफ कटौती की गई है। चार श्रम संहिता और VB G-RAMG के ज़रिये शहरी मज़दूरों और ग्रामीण श्रमिकों पर आरएसएस-भाजपा सरकार का पूर्ण पैमाने का हमला पहले से ही कॉर्पोरेट घरानों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सेवा में है। केंद्रीय बजट 2026-27 में व्यापक क्षेत्रों में सीमा शुल्क हटाया गया है, जो लघु उद्योग और भारतीय उद्योग को तुरंत और दीर्घकाल में भारी नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने बताया किअमेरिकी अधिकारियों, कृषि सचिव रोलिंस ने दावा किया है कि भारत सबसे बड़ा कृषि बाज़ार है और इसके खुलने से अमेरिका के ग्रामीण इलाक़ों की आय बढ़ेगी। आरएसएस देश की सबसे बड़ी गरीब और वंचित आबादी को अपने विदेशी आकाओं के मुनाफ़े के लिए और अधिक अमानवीय हालात में धकेल रहा है। मोदी सरकार भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों को भारतीय बाज़ारों पर थोप रही है, जबकि भारतीय कृषि पहले से ही नकारात्मक सरकारी सब्सिडी से जूझ रही है। 17.2 करोड़ ग्रामीण परिवार और 86% छोटे-सीमांत किसान अपनी आजीविका पर साम्राज्यवादी हमले के गंभीर ख़तरे में हैं, जिसे भारत सरकार बढ़ावा दे रही है। संयुक्त किसान मोर्चा केवल देश के श्रम व संसाधनों के शोषण से मुनाफ़ाखोरी के इरादे से प्रेरित उन मित्र पूंजीवादी घरानों के संघों के प्रतिनिधियों की कड़ी निंदा करता है जो आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले किसानों, मज़दूरों और समस्त मेहनतकश जनता के हितों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए मोदी सरकार और राष्ट्र-विरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रशंसा में होड़ लगाए हुए हैं।किसान सभा चित्रकूट जिलाध्यक्ष विजय कुमार ने सभी राजनीतिक दलों, किसान और कृषि मज़दूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों तथा सभी जन-आधारित और वर्ग-आधारित संगठनों से अपील करता है कि वे भारतीय संसद और लोकतंत्र का घोर अपमान करने वाले, भारत के इतिहास के सबसे राष्ट्र-विरोधी व्यापार समझौतों के ख़िलाफ़ एकजुट होकर सरकार द्वारा भारतीय किसानों और कृषि को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले करने की साज़िश को रोकें। संयुक्त किसान मोर्चा देशभर के किसानों से आह्वान करता है कि वे 12 फ़रवरी 2026 को विरोध प्रदर्शनों में शामिल हों और आम हड़ताल को जन-विरोधी मोदी सरकार को करारा जवाब बनाए