पचपेडवा बलरामपुर वन क्षेत्र में अवैध कटान का बड़ा खेल, जिम्मेदारों पर गंभीर सवाल

निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेडवा (बलरामपुर) के वन क्षेत्र, विशेषकर वीरपुर रेंज के बेलभरिया बीट में अवैध कटान का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जंगली लकड़ी और ग्रामीण क्षेत्र की लकड़ी बिना किसी वैध परमिट के बड़े पैमाने पर काटकर बाहर भेजी जा रही है। इस पूरे प्रकरण में वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। 28 मार्च की रात एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लदी लकड़ी रेलवे क्रॉसिंग के पास देखी गई। मौके पर मौजूद संवाददाता की नजर पड़ते ही तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई। सूचना के बाद कार्रवाई करते हुए लकड़ी को कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय पर रखा गया। इस संबंध में जब रेंजर योगेश सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने बताया कि लकड़ी बरामद कर ली गई है, लेकिन ठेकेदार फरार है। हालांकि, मामला यहीं शांत नहीं हुआ। संवाददाता ने लगभग चार घंटे बाद देखा कि वही लकड़ी छोटे-छोटे टुकड़ों में ट्रॉली के माध्यम से आरा मिल तक पहुंचाई जा रही थी। इससे पूरे मामले में मिलीभगत की आशंका और गहरा गई। जब इस विषय में दोबारा रेंजर योगेश सिंह से बात की गई, तो उन्होंने संवाददाता पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा कि “आम आदमी के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।” इतना ही नहीं, उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई बीट क्षेत्र में नजर आया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया जाएगा। सूत्रों का दावा है कि वन विभाग के अधिकारी मयंकर सिंह और नूर हुड्डा की देखरेख में ही यह अवैध कटान लंबे समय से चल रहा है। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से लकड़ी माफिया खुलेआम जंगल की संपदा को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। 1 अप्रैल को इस मामले को लेकर निष्पक्ष जन अवलोकन द्वारा खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन इसके बावजूद उच्च अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय हो।