जमीयत उलमा के सेंट्रल डेलीगेशन ने तालीमी निज़ाम को मज़बूत करने के लिए फ़तेहपुर तहसील का दौरा किया।

जमीयत उलमा के सेंट्रल डेलीगेशन ने तालीमी निज़ाम को मज़बूत करने के लिए फ़तेहपुर तहसील का दौरा किया।

निष्पक्ष जन अवलोकन l विजय राम जायसवाल l फ़तेहपुर, (बाराबंकी) l जमीयत उलमा के सेंट्रल डेलीगेशन ने तालीमी निज़ाम को मज़बूत करने के लिए फ़तेहपुर तहसील का दौरा किया। जहाँ उसने जमीयत उलमा की एक कंसल्टेटिव मीटिंग में हिस्सा लिया। कंसल्टेटिव मीटिंग में मौजूद इमामों और मदरसों और मकतबों के प्रमुखों को संबोधित करते हुए मुफ़्ती अबू बक्र सिद्दीक मंसूरपूरी ने कहा कि हर मुसलमान पर लाज़िम है कि अपनी नई नस्ल की सही तालीम और तरबियत का इंतज़ाम करे और उन्हें धर्म की बेसिक बातें सिखाए।हज़रत याकूबअलैहिस्सलाम की घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पैगंबरों की शिक्षाएँ हमें यह संदेश देती हैं कि अपने बच्चों के ईमान और किरदार की फ़िक्र करनी चाहिए।अंजुमन मुस्लिम आना फंड के कैम्पस में इशा की नमाज़ बाद आयोजित विचार- विमर्श बैठक की अध्यक्षता जमीयत उलमा की यूनिट अध्यक्ष मौलाना मु० साबिर कासमी ने की, जबकि संचालन बाराबंकी यूनिट जनरल सेक्रेटरी मौलाना मुहम्मद जमाल कासमी ने किया।बैठक का शुभारंभ कारी ज़कीउल्लाह हुसैनी ने कुरान की तिलावत से किया और नाते-रसूल जमीयत उलमा यूनिट, तहसील फतेहपुर के जनरल सेक्रेटरी एडवोकेट अहमद सईद हर्फ ने पेश की। जमीयत उलमा-ए-हिंद के तालीमी बोर्ड के तहत मस्जिदों के इमामों, मुतावल्लियों और मोहतमिम मदारिस व मकातिब की यह अहम विचार विमर्श बैठक क्षेत्र की नई नस्ल और युवाओं को तालीम और तरबियत से जोड़ने और उन्हें गलत रास्तों से बचाने की दिशा में पहला कदम है, जिसके ज़रिए मदरसों और मकतबों की शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने का संकल्प लिया गया। इस मौके पर मौलाना मो० जमाल कासमी ने भाषण में कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने आज़ादी से पहले ही मकतब सिस्टम की नींव रखी थी और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना महमूद असद मदनी की मार्गदर्शन में पूरे देश में एक बड़ा मकतब सिस्टम व्यवस्थित ढंग से लागू करने की कोशिश हो रही है।उन्होंने कहा कि बच्चों को नैतिक और सामाजिक बुराइयों से बचाने के लिए मकतब आज के समय की ज़रूरत हैं। तालीमी बोर्ड के डायरेक्टर मौलाना मो० शोएब कासमी ने कहाकि हालांकि स्कूल पहले से ही बन चुके हैं, इंशाअल्लाह, बच्चों को उनका फायदा ऑर्गनाइज़्ड और प्लान्ड तरीके से मिलना ज़रूरी है, जिसके लिए ज़िम्मेदार लोगों को सोचना होगा। मौलाना मो० हातिब ने अपने विचार रखते हुए कहा कि अपने बच्चों के ईमान की रक्षा हेतु हमें मस्जिदों में मकतब क़ायम करने होंगे और उन्हें दीनी तालीम देनी होगी। बैठक का समापन मुफ़्ती अबूबक्र सिद्दीक मंसूरी की दुआ से हुआ। अन्त मे अहमद सईद हर्फ़ ने सबका शुक्रिया अदा किया। इस मौके पर मौलाना असगर अली नदवी, मुफ्ती शमसाद अली कासमी, मुफ्ती मो० उमैर कासमी, मौलाना मुहम्मद अमीन मज़ाहेरी, मौलाना मो० अरकम रशीदी, मौलाना अता-उर-रहमान नदवी, मौलाना फखरुद्दीन हकी, मौलाना मु० आफाक नदवी, मौलाना फैज आलम नदवी, कारी मु० गुफरान, हाफिज मु० अकरम, हाफिज मु० कलीम कुरैशी, हाजी शेख मतीउल्लाह, हाजी एजाज अहमद अंसारी, आजम अली, हाजी मु०रईस कुरैशी, मु० नफीस, मुनीर हैदर, मु० सोहेल खान, मुहम्मद अकीक पप्पू, मु०शफीक, मु० अकील राजा, इब्राहिम, रेहान कुरैशी, मुहम्मद ताहिर राईन आदि लोग मौजूद थे।