सहकारी कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ बिगुल, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

सहकारी कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ बिगुल, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

निष्पक्ष जन अवलोकन अजय रावत ।। बाराबंकी ।सहकारिता विभाग के कर्मचारियों एवं सचिवों की जी आई सी आडिटोरियम में आयोजित बैठक में कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जिले भर के सचिव एवं कर्मचारी सामूहिक इस्तीफा देने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। बैठक में कर्मचारियों ने जिला अध्यक्ष सुदामा पांडेय की अध्यक्षता में आठ सूत्रीय ज्ञापन तैयार किया, जिसे सोमवार को जिलाधिकारी बाराबंकी एवं सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता को सौंपा जाएगा। कर्मचारियों ने मांग की कि सचिवों पर दर्ज किए गए मुकदमों तथा जिन कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है, उन सभी कार्रवाईयों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा लगातार सचिवों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि सहकारी समितियों के सचिवों को सरकार की ओर से किसी प्रकार का वेतन नहीं दिया जाता है। सचिव वर्षों से बिना वेतन के कार्य कर रहे हैं। खाद वितरण के दौरान मिलने वाले मामूली कमीशन से ही उनका जीवनयापन एवं परिवार का खर्च चलता है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि जब सरकार वेतन तक नहीं दे रही है, तब सचिवों पर लगातार कार्रवाई और मुकदमे थोपना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। यह भी आरोप लगाया कि पीसीएफ द्वारा धान एवं गेहूं खरीद का कमीशन पिछले तीन वर्षों से समितियों को नहीं दिया गया है, जिससे अधिकांश समितियां आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। कर्मचारियों ने कहा कि कमीशन न मिलने के कारण समितियों का संचालन प्रभावित हो रहा है और कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने लंबित कमीशन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की। उर्वरक वितरण व्यवस्था को लेकर भी कर्मचारियों ने गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि शासन द्वारा फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर उर्वरक वितरण के निर्देश तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन जिन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया अभी तक पूर्ण नहीं हुई है तथा जहां किसान बटाईदारी पर खेती कर रहे हैं, और बड़े किसानों को खाद वितरण किस आधार पर किया जाए इसकी कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। कर्मचारियों ने कहा कि जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर सचिवों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में विवाद और मुकदमों की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। बैठक में कर्मचारियों ने अतिरिक्त समितियों का प्रभार तत्काल समाप्त करने, कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बंद करने, कार्य व्यवस्था को व्यावहारिक एवं पारदर्शी बनाने, झूठे मुकदमों पर रोक लगाने तथा सहकारी कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग भी उठाई। बैठक के अंत में कर्मचारियों ने एकजुटता का संकल्प लेते हुए कहा कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर जिले भर के सचिव सामूहिक इस्तीफा देकर शासन को अपनी ताकत का एहसास कराएंगे। बैठक में दिवाकर पांडेय, त्रिदेव तिवारी आनंद गुप्ता,जितेंद्र वर्मा,दीपू वर्मा, शशिकांत द्विवेदी, राजेश कुमार विनोद कुमार, संदीप गुप्ता, अमर सिंह वर्मा, दुर्गेश पांडे प्रमोद तिवारी, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।