तृतीय दिवस के प्रवचन में व्यास जी ने वराह अवतार सृष्टि की उत्पत्ति मनु शतरूपा की वंश परंपरा तथा दक्ष यज्ञ और माता सती के प्रसंग का वर्णन

तृतीय दिवस के प्रवचन में व्यास जी ने वराह अवतार सृष्टि की उत्पत्ति मनु शतरूपा की वंश परंपरा तथा दक्ष यज्ञ और माता सती के प्रसंग का  वर्णन

निष्पक्ष जन अवलोकन। रामशंकर वर्मा।

रामनगर बाराबंकी। तहसील रामनगर की ग्राम पंचायत गणेशपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।कथा व्यास आचार्य अश्वनी कुमार त्रिपाठी ने भावपूर्ण ओजस्वी एवं सारगर्भित प्रवचनों के माध्यम से श्रोताओं को धर्म श्रद्धा और जीवन दर्शन का गूढ़ संदेश दिया जिससे पूरा पांडाल बार-बार तालियों और जयघोष से गूंज उठा।तृतीय दिवस के प्रवचन में व्यास जी ने वराह अवतार सृष्टि की उत्पत्ति मनु शतरूपा की वंश परंपरा तथा दक्ष यज्ञ और माता सती के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया।उन्होंने बताया कि जब पृथ्वी रसातल में चली गई थी तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण कर पृथ्वी की रक्षा की।यह प्रसंग इस सत्य को दर्शाता है कि जब जब धर्म संकट में पड़ता है भगवान स्वयं उसकी रक्षा के लिए अवतरित होते हैं।कथा के दौरान आचार्य अश्वनी कुमार त्रिपाठी ने कहा कि धर्म केवल कर्म से नहीं बल्कि भावना और श्रद्धा से फलित होता है।बिना श्रद्धा के पूजा, यज्ञ और कथा भी निष्फल हो जाते हैं।उन्होंने यह भी बताया कि स्त्री का सम्मान सनातन धर्म की आधारशिला है और नारी माँ बहन पत्नी तथा पुत्री चारों रूपों में पूजनीय है।दक्ष यज्ञ के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने अहंकार के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब अहंकार धर्म पर हावी हो जाता है तब विनाश निश्चित हो जाता है।माता सती का त्याग इस बात का प्रतीक है कि जहाँ पति और धर्म का अपमान होता है वहाँ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।कथा व्यास की सरल शैली प्रभावशाली उदाहरणों और भावनात्मक प्रस्तुति ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा।श्रद्धालु भक्ति-भाव में डूबे रहे और हरि-हर व जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।कार्यक्रम में यजमान सुरेश कुमार शुक्ला एवं लक्ष्मी शुक्ला सहित बच्चा डॉक्टर वृद्धि जैन पंडित विमल अवस्थी कुलदीप गुप्ता मुरारी अवस्थी अमित त्रिवेदी ललित त्रिवेदी शुभम यादव मनीष तिवारी अंकुर गुप्ता हरिओम माधव राज मिश्र अवधेश शुक्ला आर.के. शुक्ला विष्णु कुमार शुक्ला अनुपम शुक्ला के.के. शुक्ला आनंद शुक्ला रजत अवस्थी पुनीत त्रिवेदी देव कुमार, आशीष शुक्ल व्योम विनायक विराट सहित अनेक गणमान्य लोग ग्रामीण श्रद्धालु महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में कथा के अन्य गूढ़ एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा