जनपद में उर्वरक दुरुपयोग रोकने पर कलेक्ट्रेट सभागार में निगरानी समिति की बैठक हुई आयोजित
निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट।जिलाधिकारी ने संतुलित उर्वरक उपयोग हेतु जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को नियंत्रित करने, संतुलित पोषक तत्वों के प्रयोग करने तथा उर्वरकों के अवैध परिसंचलन, तस्करी, कालाबाजारी व ओवर रेटिंग रोकने, मृदा में संस्तुत मात्रा के अनुरूप उर्वरकों के प्रयोग एवं जैविक उर्वरकों के अधिक प्रयोग हेतु जागरूक करने के साथ ही मृदा स्वास्थ्य में अनुकूल परिवर्तन लाने के उद्देश्य से "धरती माता बचाओ अभियान" के अन्तर्गत गठित "जिला स्तरीय धरती माता बचाओ निगरानी समिति" की बैठक जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता में दिनांक-28.01.2026 को दोपहर कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। जिला कृषि अधिकारी राज पति शुक्ल ने बताया कि जनपद के कृषकों द्वारा मृदा स्वास्थ्य की जानकारी के अभाव में रसायनिक उर्वरको का संस्तुत मात्रा से अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाता है, जिसके सम्बन्ध में कृषि विभाग के अधिकारी / कर्मचारी, सहकारिता विभाग के अधिकारी / कर्मचारी तथा फुटकर उर्वरक विक्रेताओ के द्वारा कृषको को अधिक से अधिक जागरूक करते हुए उर्वरको के संतुलित प्रयोग हेतु प्रोत्साहित किया जाय। फसलों के लिए अन्य पोषक तत्वों यथा जिंक, लोहा, सल्फर आदि का उपयोग भी भूमि की दशा के अनुसार किया जाय ताकि फसलों का अपेक्षित उत्पादन प्राप्त हो सके। साथ ही अवगत कराया कि जनपद चित्रकूट मध्य प्रदेश की सीमा से लगे होने के कारण उर्वरकों के डायवर्जन होने की सम्भावना बनी रहती है। उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध परिसंचलन व तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण हेतु जनपद में निरंतर सघन छापेमारी अभियान चलाकर प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। अब तक कुल 139 छापे आयोजित कर 8 उर्वरक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलम्बित किये गये हैं, 3 लाइसेंस निरस्त किये गये हैं, व उर्वरक वितरण में अनियमितता की जानकारी होने पर एक फर्म के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने धरती माता बचाओ अभियान की निगरानी समिति की बैठक में उपस्थिति सदस्यों, उर्वरक विक्रेताओं व प्रगतिशील कृषकों से कहा कि धरती माता बचाओ अभियान की निगरानी/समीक्षा भारत सरकार के स्तर से नियमित रूप से की जा रही है। रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुन्ध प्रयोग, अवैध रूप से उर्वरकों के डायवर्जन, कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से जनपद, तहसील व ग्राम स्तर पर धरती माता बचाओ निगरानी समिति का गठन कर प्रभावी कार्यवाही किये जाने हेतु भारत सरकार से निर्देश प्राप्त हुए हैं। अतः सभी इस विषय में जागरुक रहें कि मिट्टी परीक्षण के अनुसार संस्तुत की गई उर्वरक मात्रा का ही उपयोग करें जिससे उत्तम मानव व पशु के स्वास्थ्य बना रहे और पर्यावरण भी प्रदूषित न हो। ग्राम स्तरीय निगरानी समिति के अध्यक्ष सम्बन्धित ग्राम प्रधान व संयोजक सम्बन्धित ग्राम पंचायत अधिकारी हैं। क्षेत्रीय लेखपाल, ड्रोन दीदी पंचायत सहायक, साधन सहकारी समिति के सचिव, ग्राम पंचायत के दो प्रगतिशील कृषक, सम्बन्धित प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी बी०टी०एम०/ए०टी०एम०/सम्बन्धित न्याय पंचायत प्रभारी, ग्राम पंचायत स्तर से सम्बन्धित कृषक उत्पादन संगठन के निदेशक मण्डल इसके सदस्य होंगे। इसी प्रकार तहसील स्तरीय निगरानी समिति के अध्यक्ष सम्बन्धित उपजिलाधिकारी तथा सदस्य सचिव संबंधित उप सम्भागीय कृषि प्रसार अधिकारी होंगे। इस समिति में तहसील के समस्त खण्ड विकास अधिकारी, थाना प्रभारी/नामित पुलिस उप निरीक्षक, उर्वरक विक्रेता संघ कम्पनी के नामित प्रतिनिधि, प्रतिनिधि सहकारिता विभाग के अपर जिला सहकारी अधिकारी, समस्त सहायक विकास अधिकारी (कृषि/कृषि रक्षा) / वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-बी सदस्य होंगे। ग्राम स्तरीय समितियों के द्वारा अपने कार्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति विशेष या व्यक्तियों के समूह के द्वारा उर्वरकों की अत्यधिक बिक्री किये जाने की निगरानी करते हुए इसके कारण का पता लगाया जायेगा। इसके अतिरिक्त उर्वरकों के गैर कृषि उपयोग, डायवर्जन या राज्य की सीमा से बाहर तस्करी के मामले में गोपनीय तरीके से जानकारी प्राप्त कर, सूचना एकत्र कर तहसील व जिला स्तरीय निगरानी समिति को उपलब्ध कराया जायेगा। साथ ही किसानों को अपने खेत की मृदा संरचना में सुधार हेतु रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग करने के साथ-साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती को अपनाने हेतु प्रेरित किया जायेगा। इसी प्रकार तहसील स्तरीय निगरानी समितियों के द्वारा उपरोक्त कार्यों के साथ-साथ तहसील स्तर पर कृषि निवेशों उर्वरक की उपलब्धता / वितरण व साथ ही ग्राम स्तरीय समितियों से प्राप्त गोपनीय सूचनाओं के आधार पर उर्वरकों कालाबाजारी / तस्करी करने वाले व्यक्तियों/ संस्थाओं के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही की जायेगी। जिलाधिकारी द्वारा बैठक में उपस्थित समस्त उर्वरक कम्पनी के प्रतिनिधियों, थोक उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिये गये किसी भी परिस्थिति में अनुदानित उर्वरक निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर विक्रय न किया जाए तथा उनके साथ किसी भी अन्य उत्पाद को टैगिंग के रूप में न दिया जाए, यदि कोई भी प्रकरण प्रकाश में आता है तो सम्बन्धित के विरूद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अन्तर्गत आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। उक्त अवसर पर उपायुक्त श्रम रोजगार डी एन पाण्डेय, उप कृषि निदेशक राज कुमार, भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राम सिंह राही के साथ ही उर्वरक प्रदायकर्ता कंपनियों के प्रतिनिधि, थोक उर्वरक विक्रेता व सैकड़ों की संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।