मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल: मास्टर रोल पर नाम, ज़मीन पर मज़दूर गायब! अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन की लूट, गरीब मज़दूरों के हक़ पर डाका—जांच के नाम पर सिर्फ़ खानापूरी, सिस्टम पर बड़ा सवाल
विकासखंड गैसड़ी (बलरामपुर )में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर घोटाले का मामला सामने आया है। फर्जी मास्टर रोल और ऑनलाइन हाजिरी के जरिए सरकारी धन की खुली लूट की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित अधिकारियों को इसका कोई फर्क नहीं पड़ता और आज भी कई ग्राम पंचायतों में बिना मजदूर, बिना औजार और बिना काम के फर्जी हाजिरी दर्ज की जा रही है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत निश्चल डीह, नवानगर और त्रिकुलिया में मनरेगा कार्यस्थलों पर न तो मजदूर मौजूद मिले, न ही फावड़ा, कुदाल या टोकरी जैसे जरूरी औजार। इसके बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति नियमित रूप से भरी जा रही है। यानी कागजों और पोर्टल पर काम चल रहा है, जबकि जमीनी हकीकत शून्य है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से कार्यस्थल पर कोई गतिविधि नहीं दिखी, लेकिन मास्टर रोल में मजदूरों की पूरी हाजिरी दर्ज है। इससे साफ जाहिर होता है कि फर्जीवाड़ा योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। निष्पक्ष जन अवलोकन लगातार 11 जनवरी से इस घोटाले को उजागर कर रहा है, बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब संवाददाता ने दूरभाष पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया तो रटे-रटाए जवाब दिए गए कि “जांच चल रही है।” लेकिन जमीनी स्तर पर जांच का कोई असर नजर नहीं आ रहा। सूत्रों का दावा है कि बीडीओ, ग्राम प्रधान, सचिव और मनरेगा से जुड़े कर्मियों की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। इतना ही नहीं, बीडीओ द्वारा यह कहना कि “खबर छापते रहो, हम जांच करते रहेंगे, काम चलता रहेगा,” प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार को उजागर करता है। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस पूरे मामले में प्रशासन की चुप्पी नहीं, बल्कि सक्रिय मिलीभगत है। अब सवाल यह है कि गरीब मजदूरों के हक की इस लूट पर कब कार्रवाई होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई गाज गिरेगी, या फिर मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना यूं ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेगी।