सरीला क्षेत्र के चंदवारी डांडा खंड संख्या 26/8 में हो रहा बालू का अवैध खनन

निष्पक्ष जन अवलोकन अनिल खटीक स्वीकृत पट्टा से बाहर व बीच नदी में प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों ने मचाया तांडव, NGT के नियमों व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दबंग बालू खनन माफिया नदी का सीना चीरकर निकाल रहा लाल सोना, सरीला (हमीरपुर)। जिले में बालू का अवैध खनन का बड़ा खेल खेला जा रहा हैं। बालू खनन माफिया द्वारा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जबकि जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनन पर कार्यवाही भी की जा रही हैं। लेकिन कड़ी कार्रवाई न होने से लगातार बालू का अवैध खनन कर बालू माफिया सरकार को भारी राजस्व का चूना लगाने में लगे हुए हैं। और जिला प्रशासन दबंग बालू माफिया पर सख्त कार्यवाही करने से आखिर क्यों भयभीत हैं। इतना ही नही इस खनन माफिया द्वारा असलहों के दम पर अवैध खनन करके ओवरलोड औऱ एनआर पर ट्रैकों से निकासी धड़ल्ले से की जा रही हैं। दबंग बालू खनन माफिया बेखौफ होकर शासन प्रशासन को खुली चुनौती दे। सरीला तहसील क्षेत्र के चंदवारी डांडा खंड संख्या 26/8 में बालू का अवैध खनन करने वाले दबंग खनन माफिया से भयभीत ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कार्यवाही करने की मांग की है। लेकिन शिकायत करने के बाद भी माफिया पर कोई कार्यवाही अमल में नही लायी जा रही है और जिम्मेदार अंजान बने हुए है। ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि 15 दिवस पूर्व सरीला एसडीएम से शिकायत करने के बाद भी कार्यवाही नही की गई। आरोप है कि कि अवैध खनन होने के बाद भी ऊपर से आदेश न आने की बात कहकर सरीला एसडीएम बलराम गुप्ता द्वारा मामले को टाल दिया गया। जबकि मामले में खनिज अधिकारी विकास परमार से बात हुई तो उन्होंने मामले को टालते हुए बताया कि शिकायत पर जांच की गई थी पर ऐसा कुछ अवैध खनन नही हुआ।जब उनसे पूछा गया कि नदी की जलधारा को रोककर अस्थाई पुल बनाकर जालौन की सीमा से भी निकासी की जा रही है। तो क्या यह नियम विरुद्ध नही है। पूछा कि वायरल हो रहा खदान में खनन कर रही हैवी पोकलैंड मशीने नदी की जलधारा में खनन करती दिख रही है जिस पर खनिज अधिकारी ने पुनः जांच कर कार्यवाही की बात कही है। चंदवारी डांडा खंड संख्या 26/8 में दबंग बालू खनन माफिया NGT और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए नदी को छल्ली करने में लगे हुए हैं। और स्वीकृत पट्टा से बाहर नदी में दिन रात प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों से नदी की बीच जलधारा में अवैध खनन कर जिला प्रशासन को खुलेआम चुनौती दे रहा है। वहीं दबंग बालू माफिया नदी में पत्थरों का पुल बनाकर जालौन जिले की सीमा से भी अवैध खनन का खेल जमकर खेला जा रहा है। और लोकेटरो के बल पर बराबर बालू से भरे ओवरलोड ट्रैकों से निकासी की जा रही है। हालांकि परिवहन विभाग हमीरपुर द्वारा ओवरलोड ट्रैकों पर लगातार कार्यवाही की जा रही हैं इसके बाद भी बिना फिटनिट और एनआर पर ओवरलोड ट्रैकों से बालू की निकासी की जा रही है। जिससे सरकार को भारी राजस्व का चूना लगाने में लगे हुए हैं। जिसका ग्रामीणों द्वारा अवैध खनन की स्थानीय प्रशासन को शिकायत करने के बाद भी कार्यवाही न होने से ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए खनिज विभाग की सांठगांठ और मजदूरों की मजदूरी न देने का आरोप लगाया है। आरोप है कि दबंग खनन माफिया द्वारा ग्रामीणों को दबंगई दिखाते हुए शिकायत करने पर जेल भेजने की धमकी देने का आरोप लगाया है। जिससे दबंग बालू खनन माफिया से ग्रामीणों में भय बना हुआ है। और भयभीत ग्रामीणों द्वारा जिला प्रशासन को शिकायत करने पर भी कतरा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय के सामने से दिन रात मौरंग से भरे ओवरलोड ट्रैकों की निकासी होने से घंटों जाम की स्थिति बनी रहती हैं। और मासूम बच्चे इतने भयभीत हैं कि विद्यालय जाने से भी डरते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नदी में प्रतिबंधित पोकलैंड मशीनों से बालू खनन होने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है। क्या ? बालू माफिया इतना दबंग और ऊपर तक पहुंच वाला है कि जिस पर जिला प्रशासन को कार्यवाही करने से पहले बार बार सोचना पड़ रहा है। जबकि रात में खनन नहीं होना चाहिए। क्या बीच नदी में पत्थरों का पुल बनाकर स्वीकृत पट्टा से बाहर भी खनन करने पर कार्यवाही नहीं होनी चाहिए? आखिर बिना नंबर प्लेट के ट्रैकों को जनपद में कैसे प्रवेश कर रहे हैं। क्या जिला प्रशासन अवैध खनन और ओवरलोड ट्रैकों की निकासी पर अंकुश लगा पाएगा। हालांकि जब खनिज अधिकारी विकास परमार से बात की गई तो उन्होंने कार्यवाही का आश्वासन दिया है। लेकिन देखना यह है कि आखिर ऐसे दबंग बालू माफिया पर जिला प्रशासन कब तक कार्यवाही करता है।