कागजों में मजदूर, धरातल पर सन्नाटा

कागजों में मजदूर, धरातल पर सन्नाटा

निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेड़वा विकासखंड के कई ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत चल रहे कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत औराहवा, लाइबुडवा और सोनाहवा में कागजों पर भारी संख्या में मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। सूत्रों के अनुसार औराहवा में 5 मास्टर रोल पर 50 मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की गई है। आरोप है कि मजदूरों को केवल फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया जाता है, जबकि धरातल पर कोई वास्तविक कार्य नहीं हो रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधान, सचिव, मनरेगा जेई और बीडीओ की मिलीभगत से सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। लाइबुडवा ग्राम पंचायत में 7 मास्टर रोल पर 62 मजदूरों की उपस्थिति ऑनलाइन दिखाई गई। लेकिन जब मीडिया टीम कार्यस्थल पर पहुंची तो न मजदूर मिले, न औजार, न निर्माण सामग्री। स्थल पूरी तरह सुनसान मिला, जिससे ऑनलाइन दर्ज उपस्थिति पर सवाल और गहरे हो गए। सोनाहवा में 3 मास्टर रोल पर 30 मजदूरों की हाजिरी दर्ज है। यहां मनरेगा से कुलाखुदाई का कार्य कागजों में चल रहा है, जबकि मौके पर कोई मजदूर उपस्थित नहीं रहता। ग्रामीणों का आरोप है कि रोजगार सेवक फाइल तैयार कर मनरेगा जेई को भेज देता है और भुगतान पास होते ही धन का बंटवारा कर लिया जाता है। मीडिया द्वारा संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन कॉल रिसीव नहीं किए गए।