हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर गोरखपुर में संगोष्ठी, विरासत और भविष्य पर मंथन

गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर संगोष्ठी आयोजित हुई। वक्ताओं ने पत्रकारिता की विरासत, संघर्ष, स्वतंत्रता, सुरक्षा और डिजिटल भविष्य पर विस्तार से विचार रखे।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर गोरखपुर में संगोष्ठी, विरासत और भविष्य पर मंथन
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित संगोष्ठी में विचार व्यक्त करते अतिथि

विभव पाठक

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर। हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में प्रेस क्लब सभागार में "हिंदी पत्रकारिता : विरासत, संघर्ष और भविष्य" विषय पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, वरिष्ठ पत्रकारों और बड़ी संख्या में मीडिया कर्मियों ने भाग लिया। संगोष्ठी में हिंदी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा, उसके संघर्षपूर्ण इतिहास, वर्तमान चुनौतियों तथा डिजिटल युग में भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित ‘उदन्त मार्तण्ड’ हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक शुरुआत थी। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में हिंदी भाषा में समाचार पत्र निकालना अत्यंत साहसिक कदम था, जिसने भारतीय समाज को अपनी भाषा में अभिव्यक्ति का मंच प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उसकी भूमिका केवल समाचार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करना, सत्ता को जवाबदेह बनाना तथा जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देना भी है। इस अवसर पर प्रेस क्लब अध्यक्ष द्वारा डिजिटल लाइब्रेरी स्थापना की मांग रखी गई, जिस पर सभापति ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए प्रस्ताव तैयार कर भेजने का सुझाव दिया।

मुख्य वक्ता प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि लेखक और पत्रकार समाज की आवाज होते हैं। जो बात समाज नहीं कह पाता, उसे पत्रकार अपनी लेखनी से सामने लाता है। उन्होंने हिंदी साहित्य और पत्रकारिता के गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रेमचंद तथा महात्मा गांधी के प्रकाशनों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का जन्म ही संघर्ष से हुआ है और इसका मूल उद्देश्य अभिव्यक्ति को स्वर देना है।

विशिष्ट अतिथि शिव शरण सिंह ने पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त सभी पत्रकारों के लिए पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि पत्रकारिता की गुणवत्ता उसकी स्वतंत्रता पर निर्भर करती है। सुरक्षित और स्वतंत्र माहौल मिलने पर ही पत्रकार निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता कर सकते हैं। उन्होंने डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार करते हुए पत्रकारों से समय के साथ तकनीकी बदलावों को अपनाने का आह्वान किया।

मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष अरविंद राय ने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता जमीनी रिपोर्टिंग और पेशे के प्रति ईमानदारी से ही बनी रहती है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश सिंह और जगदीश लाल श्रीवास्तव ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित रखने पर बल दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी के स्वागत संबोधन से हुआ तथा संचालन मुमताज खान ने किया। अंत में सभी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।