चार दिन में अटैचमेंट के बाद डीपीआरओ की बाराबंकी वापसी चर्चा का विषय बनी क्या फिर होगा टकराव या बनेगा तालमेल बड़ा सवाल है
अजय रावत निष्पक्ष जन अवलोकन बाराबंकी। जिला पंचायत राज अधिकारी नितेश भोंडेले का लखनऊ संबद्धीकरण निरस्त होने के बाद पुनः जिले में लौटना प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। महज चार दिन बाद उनकी वापसी को कई लोग इस रूप में देख रहे हैं कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत है और शासन ने उन्हें फिर बाराबंकी में जिम्मेदारी संभालने का अवसर दिया है। डीपीआरओ की वापसी के बाद यह भी चर्चा है उनसे जो जिले के जनप्रतिनिधि नाराज थे क्या वे अब खुश हो गए हैं। बताया जाता है कि पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का एक वर्ग डीपीआरओ की कार्यशैली का समर्थक माना जाता है इसी लिए विभागीय सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चाएं सामने आ रही हैं कि उन्हें बाराबंकी में बनाए रखने के लिए पंचायती राज विभाग से जुड़े सचिवों ने उनकी वापसी के लिए प्रयास किए और चंदा भी दिया।हालांकि इन दावों और चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनप्रतिनिधियों,मंत्री और डीपीआरओ के बीच पहले जैसी स्थिति बनी रहेगी या फिर दोनों पक्ष विकास कार्यों और पंचायत व्यवस्था को लेकर बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे। फिलहाल शासन के आदेश के बाद नितेश भोंडेले ने दोबारा कार्यभार संभाल लिया है और आने वाले दिनों में उनके तथा जनप्रतिनिधियों के बीच संबंध किस दिशा में जाते हैं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।









