साहित्य साधना काशी मंच की ऑनलाइन कवि गोष्ठी संपन्न, अरुण कुमार श्रीवास्तव की ग़ज़ल रही आकर्षण का केंद्र
अखिल भारतीय विश्वशांति मिशन से संबद्ध साहित्य साधना काशी मंच की ऑनलाइन कवि गोष्ठी में देशभर के कवियों ने संस्कृत श्लोक, गीत और ग़ज़ल प्रस्तुत कर साहित्यिक माहौल बनाया।
विभव पाठक
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। अखिल भारतीय विश्वशांति मिशन से संबद्ध साहित्य साधना काशी मंच द्वारा आयोजित ऑनलाइन कवि गोष्ठी साहित्यिक और सांस्कृतिक सरोकारों से परिपूर्ण रही। संस्कृत विषय पर आयोजित इस आभासी कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कवियों, साहित्यकारों और ग़ज़लकारों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में संस्कृत श्लोक, सुभाषित, गीत, ग़ज़ल और समसामयिक रचनाओं की विविध प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ रतलाम के साहित्यकार एवं संचालक सतीश शिकारी ने स्वरचित संस्कृत श्लोक से किया। इसके बाद जबलपुर से मंच की संरक्षिका सरोज विश्वकर्मा ने सभी काव्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। गोरखपुर की कवयित्री प्रेमलता राबिंदु ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए साहित्य साधना को समाज की सकारात्मक ऊर्जा बताया।
दिल्ली की सुप्रसिद्ध कवयित्री मीरा सक्सेना माधवी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। उन्होंने संस्कृत सुभाषितों के कई श्लोक पढ़कर पूरे मंच को संस्कृतमय बना दिया। गुवाहाटी, असम की ग़ज़लकारा एवं लेखिका मधु माहेश्वरी ने “नमामि शमीशम्” श्लोक का पाठ कर श्रोताओं की खूब प्रशंसा प्राप्त की।
वाराणसी की संगीता श्रीवास्तव ने गीत “डोर रिश्तों की है नाजुक सी, संभाले रखना” प्रस्तुत कर मानवीय संबंधों की संवेदनशीलता को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया। राजस्थान के डॉ. राम अवतार शर्मा ‘राम’ ने “अब बदलने से लगे हैं लोग मेरे गांव के” गीत के माध्यम से बदलते सामाजिक परिवेश का चित्रण किया।
जबलपुर की सरोज विश्वकर्मा ‘नलिनी’ ने संस्कृत श्लोक “एषां न विद्या तपो न ज्ञानम्” प्रस्तुत किया, वहीं प्रेमलता रसबिंदु और अंजनी कुमार सुधाकर ने भी संस्कृत सुभाषितों और श्लोकों की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक बनाया। डॉ. अर्चना श्रेया ने भी संस्कृत श्लोकों का पाठ किया।
गोरखपुर से विश्वशांति मिशन के अध्यक्ष एवं साहित्य साधना मंच के अध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव ने अपनी चर्चित ग़ज़ल “कुछ लोग सियासत का हुनर बांट रहे हैं, इस देश को ही घुन की तरह चाट रहे हैं” सुनाकर समकालीन राजनीति और सामाजिक स्थितियों पर तीखा व्यंग्य किया। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।
इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश के रामनिवास तिवारी, वाराणसी की साधना साही, बिलासपुर की जलेश्वरी वस्त्रकार तथा उदयपुर की डॉ. संजीदा खानम शाहीन ने भी गीत, ग़ज़ल और क्षेत्रीय भाषा की रचनाएं प्रस्तुत कर कार्यक्रम को बहुरंगी साहित्यिक आयाम दिए। अंत में अरुण कुमार श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।









