गोरखपुर: बिलंदपुर की विवादित जमीन को लेकर डॉक्टर एलबी गुप्ता पर कब्जे की कोशिश का आरोप, मामला कोर्ट में लंबित
गोरखपुर के बिलंदपुर क्षेत्र में विवादित जमीन को लेकर डॉक्टर एलबी गुप्ता पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी मौजूद है।
विभव पाठक / ब्यूरो वहीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। शहर के चर्चित चिकित्सक डॉक्टर एलबी गुप्ता एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। इस बार उन पर बिलंदपुर क्षेत्र स्थित एक विवादित जमीन पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। मामले को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं और विवाद फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि संबंधित भूमि के स्वामित्व और कब्जे को लेकर पहले से ही न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। इसके बावजूद कथित रूप से जमीन पर कब्जा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीड़ित पक्ष के अनुसार, विवादित भूमि की चारदीवारी को नुकसान पहुंचाया गया तथा वहां बोर्ड लगाने का प्रयास भी किया गया, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पीड़ित पक्ष का दावा है कि उन्होंने संबंधित भूमि के काश्तकार से विधिवत पंजीकृत एग्रीमेंट कराया है और उसी आधार पर उनका भूमि पर वैध दावा है। उनका कहना है कि विवाद न्यायालय के समक्ष लंबित है तथा अदालत की ओर से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी जारी किया गया है। इसके बावजूद यदि किसी भी पक्ष द्वारा जमीन की स्थिति में परिवर्तन करने का प्रयास किया जाता है तो यह न्यायालय के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आ सकता है।
दूसरे पक्ष ने आरोप लगाया है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले जमीन पर कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं, जो कानून व्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकती हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले में निष्पक्ष हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि जब तक अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक किसी भी पक्ष को भूमि पर निर्माण, कब्जा अथवा अन्य प्रकार की गतिविधि की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
पीड़ित पक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता है और अंतिम फैसला आने तक स्वयं भी जमीन पर कोई नया कार्य नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
फिलहाल मामला न्यायालय में लंबित है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। ऐसे में सभी की निगाहें अब अदालत के अंतिम निर्णय और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।









