भाभर रेंज में जंगल माफियाओं का आतंक, अधिकारियों की मिलीभगत से हरे-भरे पेड़ों पर चल रही आरी
निष्पक्ष जन अवलोकन। बलरामपुर। जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा क्षेत्र अंतर्गत वीरपुर भाभर रेंज में जंगल माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते दिखाई दे रहे हैं। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्रों में कथित रूप से बिना परमिट और बिना नीलामी के बहुमूल्य सखू समेत अन्य प्रजातियों के हरे-भरे पेड़ों का बड़े पैमाने पर कटान किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है। सूत्रों के अनुसार ग्राम वीरपुर बनघोसरी क्षेत्र में जंगल माफिया दिन और रात दोनों समय सक्रिय हैं। आरोप है कि किशोर, उमेश और राजेंद्र नामक व्यक्तियों द्वारा दिन में जंगल से जलाऊ लकड़ी निकाली जाती है, जबकि रात के अंधेरे में बहुमूल्य लकड़ियों का कटान कर उन्हें बाहर भेजा जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों की हरियाली पर लगातार हमला हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हुए हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि वन संपदा की सुरक्षा के लिए तैनात कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद अवैध कटान नहीं रुक रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर जंगल माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है। यदि बिना परमिट पेड़ों की कटाई हो रही है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा अब तक कोई कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। मामले की जानकारी लेने के लिए जब संवाददाता ने संबंधित वनकर्मियों से संपर्क करने का प्रयास किया तो कथित रूप से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि शिकायत उठाने वालों को ही डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है। वन क्षेत्र में लगातार हो रहे कटान से पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं और सरकार की वन संरक्षण योजनाओं पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जंगलों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, या फिर जंगल माफियाओं का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।









