गोरखपुर: SC प्रमाण पत्र की मांग को लेकर निषाद समाज का अनशन दूसरे दिन भी जारी
गोरखपुर में निषाद युवा वाहिनी द्वारा निषाद समाज की उपजातियों को SC प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। समाज ने सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
विभव पाठक
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। निषाद समाज की विभिन्न उपजातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाण पत्र जारी किए जाने की मांग को लेकर निषाद युवा वाहिनी द्वारा शुरू किया गया आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। शहर स्थित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष चल रहे इस अनशन में समाज के लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अनशनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अनशन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल और दिल्ली में निषाद समाज की कई उपजातियों को अनुसूचित जाति का लाभ प्राप्त है, जबकि उत्तर प्रदेश में अब तक केवट, मल्लाह, बिंद, निषाद, धीवर, बाथम सहित अन्य उपजातियों को एससी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है। इससे समाज के लोगों को शिक्षा, रोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
निषाद युवा वाहिनी से जुड़े सुशील चंद साहनी एडवोकेट ने कहा कि समाज लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार शासन और प्रशासन के समक्ष ज्ञापन सौंपे गए, धरना-प्रदर्शन किए गए तथा आमरण अनशन जैसे लोकतांत्रिक माध्यमों से भी अपनी बात रखी गई। हर बार अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया कि मांगों पर विचार किया जाएगा, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि निषाद समाज के लोग सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं तथा उन्हें अनुसूचित जाति का दर्जा मिलने से समाज के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर जल्द निर्णय लेने की मांग की।
इस अवसर पर निरंकार सिंह एडवोकेट ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि निषाद समाज वर्षों से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को समाज की भावनाओं और मांगों को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
अनशन स्थल पर समाज के विभिन्न संगठनों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों का समर्थन देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने सरकार से शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की भी मांग की।









