सुरक्षित भंडारण से 10% तक फसल नुकसान रोका जा सकता है: कृषि विभाग
संत कबीर नगर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार ने बताया कि फसल की बुवाई से लेकर कटाई के बाद भंडारण तक हर चरण महत्वपूर्ण है।
असुरक्षित भंडारण के कारण कीट, कृन्तक और सूक्ष्मजीवों से लगभग 10 प्रतिशत खाद्यान्न नुकसान होता है। देश में यह वार्षिक क्षति करीब 14 मिलियन टन आंकी गई है, जिसकी आर्थिक कीमत लगभग 7000 करोड़ रुपये है। इसमें अकेले कीटों से करीब 1300 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि भंडारण में कीट प्रकोप के प्रमुख कारणों में अधिक नमी, ऑक्सीजन की उपलब्धता और 25 से 27 डिग्री सेल्सियस तापमान शामिल हैं। यदि अनाज में नमी 10 प्रतिशत से अधिक होती है, तो कीट और फफूंद तेजी से बढ़ते हैं, जिससे अनाज की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित होती है। डॉ. कुमार ने बताया कि कीट खेत, मड़ाई स्थल, परिवहन साधनों और पुराने गोदामों के माध्यम से भंडारण तक पहुंच जाते हैं। इसलिए कटाई से लेकर भंडारण तक विशेष सावधानी जरूरी है। सुरक्षित भंडारण के लिए उन्होंने गोदाम की सफाई और मरम्मत, दरारों को बंद करने, भंडारण से पहले मैलाथियान 50% ईसी के घोल का छिड़काव करने तथा पुराने बोरों को धूप में सुखाने या उपचारित करने की सलाह दी। साथ ही अनाज को अच्छी तरह सुखाकर (नमी 10% से कम) ठंडा करके ही भंडारण में रखने को कहा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि गोदाम में भंडारण करते समय फर्श पर सूखे भूसे की परत बिछाकर और दीवार से दूरी बनाकर बोरों को रखने से नमी से बचाव होता है और अनाज सुरक्षित रहता है।









