गर्मियों में रक्तचाप के मरीज रहें सतर्क, बढ़ सकता है स्ट्रोक और अन्य न्यूरो समस्याओं का खतरा
वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गर्मियों में हाई और लो ब्लड प्रेशर के मरीजों में स्ट्रोक, चक्कर, बेहोशी और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। जानें बचाव के उपाय।
विभव पाठक
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। गर्मियों का मौसम उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) से पीड़ित लोगों के लिए विशेष सावधानी का समय होता है। अत्यधिक गर्मी, अधिक पसीना और शरीर में पानी की कमी न केवल रक्तचाप को प्रभावित करती है, बल्कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल सिस्टम) पर भी गंभीर असर डाल सकती है।
वरिष्ठ न्यूरो फिजिशियन डॉ. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर से पानी और आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकलते हैं। इसके कारण रक्तचाप में उतार-चढ़ाव हो सकता है और मस्तिष्क तक रक्त एवं ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में कई न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. सिंह के अनुसार, गर्मियों में रक्तचाप के मरीजों को चक्कर आना, कमजोरी और बेहोशी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। डिहाइड्रेशन के कारण ब्लड प्रेशर अचानक कम हो सकता है, जिससे व्यक्ति का संतुलन बिगड़ जाता है और वह बेहोश भी हो सकता है।
उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप के मरीजों में स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। शरीर में पानी की कमी होने पर रक्त गाढ़ा होने लगता है, जिससे मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रुकावट या रक्तस्राव की संभावना बढ़ जाती है। यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।
डॉ. संतोष सिंह ने कहा कि गर्मियों में सिरदर्द, मानसिक भ्रम, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, हाथ-पैरों में झनझनाहट तथा कमजोरी जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का सीधा प्रभाव नसों की कार्यप्रणाली पर पड़ता है, जिससे न्यूरोलॉजिकल लक्षण उभर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण नींद प्रभावित होती है। पर्याप्त नींद न मिलने से रक्तचाप नियंत्रण में कठिनाई होती है और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
बचाव के लिए डॉ. सिंह ने सलाह दी कि दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। नारियल पानी, नींबू पानी और ओआरएस का सेवन शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचना चाहिए। साथ ही चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं का नियमित सेवन और रक्तचाप की समय-समय पर जांच कराना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक बोलने में परेशानी, चेहरे का टेढ़ापन, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो तो इसे स्ट्रोक का संकेत मानते हुए तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
डॉ. संतोष कुमार सिंह ने कहा कि थोड़ी सी सावधानी, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से गर्मियों में रक्तचाप से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है।









