मनुष्य का जीवन धर्म के बगैर अधूरा है । धर्म से ही जीवन में संस्कार पैदा होते हैं।

मनुष्य का जीवन धर्म के बगैर अधूरा है । धर्म से ही जीवन में संस्कार पैदा होते हैं।

निष्पक्ष जन अवलोकन विजय राम जायसवाल फतेहपुर(बाराबंकी)। मनुष्य का जीवन धर्म के बगैर अधूरा है । धर्म से ही जीवन में संस्कार पैदा होते हैं। यह विचारओमशिवालय परिसर रक्षाबंधन मेला मैदान में आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथावाचक स्वामी स्वरूपानंद महाराज जी नए व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि संस्कार की कमी और संतोष कमी के चलते आज तमाम अधिकारी वर्ग और सामान्य वर्ग के लोग आत्महत्या कर रहे हैं। इसके पीछे तनाव मुख्य कारण है। लोग संयुक्त परिवार में रहकर पहले माता-पिता की सेवा किया करते थे अब वह अकेले हो गए हैं। और जरा सी बात पर काफी तनाव ले लेते हैं यह गतिविधियां तभी बंद हो सकती हैं जब व्यक्ति धार्मिक होगा और उसे दुख और कष्ट सहन करने की क्षमता पैदा हो जाएगी।। इस मौके पर महेश शुक्ला,राजीव नयन तिवारी , राजन तिवारी, अनिल मिश्रा, सुरेश चंद्र मिश्रा,जागृति तिवारी, मोहिततिवारी,राम लखन यादव, सरदारसतनामसिंह,रामूतिवारी , अंकित मिश्रा, मुन्ना तिवारी, समीर तिवारी, पुनीत तिवारी आदि मौजूद थे।।