डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में पुनर्संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में पुनर्संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स पर तीन दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। 102 प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में पुनर्संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला शुरू
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में पुनर्संयोजक डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स कार्यशाला का उद्घाटन करते कुलपति प्रो. पूनम टंडन एवं अन्य अतिथि।

विभव पाठक / ब्यूरो चीफ 

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सोसायटी फॉर प्लांट बायोकेमिस्ट्री एंड बायोटेक्नोलॉजी (SPBB), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय “हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग ऑन रिकॉम्बिनेंट डीएनए टेक्नोलॉजीज एंड बायोइन्फॉर्मेटिक्स” कार्यशाला का सोमवार को भव्य शुभारम्भ हुआ। 22 से 24 जून तक चलने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक आणविक जीवविज्ञान एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथियों के स्वागत, माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा कार्यशाला पुस्तिका के विमोचन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन के संरक्षण और विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अजय सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष एवं अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. दिनेश यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. शान्तनु रस्तोगी ने आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्य अतिथि प्रो. नागेन्द्र कुमार सिंह ने जीनोमिक्स एवं जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम शोध कार्यों की जानकारी दी तथा प्रतिभागियों को उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए प्रेरित किया।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को भी बढ़ावा देती हैं।

उद्घाटन के बाद तकनीकी सत्र में प्रो. नागेन्द्र कुमार सिंह ने “रोल ऑफ जीनोमिक्स इन जीनोम एडिटिंग” विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों को बैक्टीरियल जीनोमिक डीएनए आइसोलेशन, एगारोज जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस तथा डीएनए विश्लेषण जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला में लगभग 102 चयनित प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। आगामी सत्रों में पीसीआर, क्लोनिंग, ट्रांसफॉर्मेशन, प्राइमर डिजाइनिंग, होमोलॉजी सर्च, फाइलोजेनेटिक विश्लेषण, मॉलिक्यूलर डॉकिंग और ड्रग डिजाइन जैसी उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जो युवा वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।