सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की उच्च स्तरीय जांच की मांग
निष्पक्ष जन अवलोकन/अमर नाथ शर्मा सोनभद्र/केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत जिले में चल रही केज कल्चर योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का गंभीर आरोप सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता अर्जुन सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी या उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आरोप है कि योजना में फर्जी जियो-टैगिंग, कागजी निरीक्षण और बिचौलियों की मिलीभगत से सरकारी धन की हेराफेरी की गई है। शिकायत के मुताबिक रिहन्द जलाशय और ओबरा जलाशय में कुल 139 लाभार्थियों के नाम पर 638 केज स्थापित दिखाए गए हैं। इनमें लगभग 228 केज रिहन्द और 410 केज ओबरा जलाशय में दर्शाए गए हैं। योजना के तहत चार केज के लिए 12 लाख की लागत स्वीकृत है, जिसमें महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत यानी 7.20 लाख अनुदान तथा 40 प्रतिशत यानी 4.80 लाख अंशदान का प्रावधान है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सदाफल, जितेंद्र, हिमांचल और रमेश नामक व्यक्तियों ने ग्रामीणों को योजना का झांसा देकर उनके आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज लेकर उनके नाम केज स्वीकृत कराकर सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि मार्च, अक्टूबर और दिसंबर 2025 में स्थलीय निरीक्षण के दौरान करीब 60 प्रतिशत केज खाली पाए गए थे। इसके बावजूद अभिलेखों में जियो-टैगिंग दिखाकर दूसरी किस्त जारी कर दी गई है। शिकायत कर्ता ने इस पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी या उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग किया है।









