नारी सशक्तिकरण का संदेश देता आदिवासी बालिकाओं का कथक प्रशिक्षण का हुआ समापन ।
निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट।आदिवासी समाज का गीत संगीत से नाता जन्मजात से चलता चला आ रहा है। संगीतमय जीवन जीना इनकी विशेष धरोहर रही है। ऐसे समाज से आने वाली बालिकाओं को सुर-ताल सीखने समझने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती इसलिए ये कोई भी विधा को बहुत जल्दी सीख-समझ लेती हैं। आदिवासी बालिकाओं में राई, कोल्हाई जैसी विधा बचपन से ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्वत ही चलती चली आ रही है। ढोलक की हर थाप पर नाचना-थिरकना इनका स्वभाव रहा है, इसलिए ये कथक जैसी विधा को बड़े ही सहज और सरल भाव से सीख समझ कर उसमें दक्ष हो रही हैं। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान रानीपुर भट्ट, चित्रकूट में पाठा की आदिवासी बालिकाओं का व्यक्तित्व निर्माण का मासिक प्रशिक्षण 15 मई से चल रहा है, इस प्रशिक्षण में बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ के सहयोग से आई कथक नृत्य प्रशिक्षिका सुश्री आकांक्षा पाण्डेय इन आदिवासी बालिकाओं को शिववंदना पर अभिनय, पारंपरिक कथक तीन ताल में आमद, ठाट, टुकड़े, बंदिशे, तिहाईयां, परन एवं लड़ी सिखा रही है। इसके साथ-साथ वे अभिनय पक्ष की भी गहराइयों को बखूबी सीख रही हैं। जैसे "मेरे झोपड़ी के भाग आज जाग जाएंगे" गीत पर इन बालिकाओं को अभिनय सीखने का अवसर मिल रहा है। कथक में द्रोपदी चीरहरण को नृत्य और नाटक के माध्यम से नारी सशक्तिकरण का संदेश भी सीख रही है। आकांक्षा पाण्डेय जी गुरु शिष्य परंपरा में विगत 13 वर्षों से अपने गुरु सुश्री सुरभि सिंह जी से शिक्षा लेकर अब देश-विदेश में भी कथक जैसी नृत्य की विधा को सिखा कर अपने हुनर का प्रसार कर रही हैं। इन सब आदिवासी बच्चियों के द्वारा इस कला का प्रदर्शन 12 जून को भारत जननी परिसर, रानीपुर भट्ट में किया जाना है। इस कार्यक्रम में जनपद के सभी कलाप्रेमी, प्रवुद्ध जन उपस्थित होंगे।









