ध्रुव कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक इंस्टिट्यूट, बंधवा (गाज़ीपुर) को लेकर पिछड़ा वर्ग विभाग एवं NIELIT की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

ध्रुव कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक इंस्टिट्यूट, बंधवा (गाज़ीपुर) को लेकर पिछड़ा वर्ग विभाग एवं NIELIT की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

निष्पक्ष जन अवलोकन

 प्रमोद सिन्हा

गाज़ीपुर। लगभग एक वर्ष पूर्व स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के माध्यम से ध्रुव कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक इंस्टिट्यूट, बंधवा (गाज़ीपुर) की आधारभूत सुविधाओं, भवन की स्थिति तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था। समाचार के माध्यम से पिछड़ा वर्ग विभाग, जिला प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों को यह बताया गया था कि यह संस्थान ट्रिपल सी एवं ओ लेवल जैसे सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बावजूद वर्ष 2026-27 में भी इसी संस्थान का चयन पुनः कर दिया गया। अब अमर उजाला ने भी अपनी प्रमुख रिपोर्ट में इसी संस्थान की तस्वीर प्रकाशित करते हुए स्पष्ट किया है कि यह संस्थान अत्यंत संकरी गली में स्थित है, मुख्य सड़क से लगभग 10 फीट नीचे है तथा आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई देती। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब पिछले वर्ष ही इस संस्थान की कमियों की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से संबंधित विभागों को दी जा चुकी थी, तब भी पिछड़ा वर्ग विभाग ने इसी संस्थान का चयन दोबारा किस आधार पर किया? क्या विभाग ने शिकायतों और पूर्व प्रकाशित समाचारों की जांच कराई थी, या उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया? इस पूरे मामले में NIELIT की मान्यता प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। यदि NIELIT द्वारा किसी संस्थान को मान्यता देने से पहले भवन, प्रयोगशाला, पहुंच मार्ग, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास तथा अन्य आवश्यक मानकों का निरीक्षण किया जाता है, तो इतने गंभीर सुरक्षा संबंधी प्रश्नों वाले संस्थान को मान्यता कैसे प्राप्त हुई? क्या वास्तविक भौतिक निरीक्षण किया गया था, अथवा केवल औपचारिकताओं के आधार पर मान्यता प्रदान कर दी गई? यदि अमर उजाला द्वारा प्रकाशित तस्वीरें और पूर्व में प्रकाशित समाचार वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं, तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं, बल्कि मान्यता एवं चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। यदि भविष्य में किसी दुर्घटना में विद्यार्थियों की जान-माल का नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या इसकी जवाबदेही केवल संस्थान की होगी, या फिर उन अधिकारियों की भी होगी जिन्होंने सभी शिकायतों और चेतावनियों के बावजूद इस संस्थान को चयनित एवं मान्यता प्राप्त बनाए रखा? जांच की मांगध्रुव कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक इंस्टिट्यूट, बंधवा (गाज़ीपुर) के चयन की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।NIELIT द्वारा दी गई मान्यता एवं निरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में किए गए चयन के आधार और चयन समिति की भूमिका की जांच की जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, मिलीभगत या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। जांच पूरी होने तक विद्यार्थियों के हित एवं सुरक्षा को देखते हुए इस संस्थान में संचालित ट्रिपल सी एवं ओ लेवल प्रशिक्षण पर पुनर्विचार किया जाए। लगातार दो वर्षों से समाचार पत्रों में सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियां उजागर होने के बाद भी यदि संबंधित विभाग और एजेंसियां कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करतीं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी जवाबदेही, चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा संभावित विभागीय भ्रष्टाचार का भी गंभीर विषय बन जाता