गोरखपुर: अस्पताल की पार्किंग में चल रही हेल्थकेयर एकेडमी? एक साल से संचालन पर उठे सवाल

गोरखपुर के एक निजी अस्पताल के बेसमेंट में संचालित GD Goenka Healthcare Academy को लेकर सवाल उठे हैं। पार्किंग क्षेत्र में संचालन के दावे के बीच फोटो-वीडियो सामने आने के बाद जांच की मांग तेज हो गई है।

गोरखपुर: अस्पताल की पार्किंग में चल रही हेल्थकेयर एकेडमी? एक साल से संचालन पर उठे सवाल
अस्पताल परिसर के बेसमेंट/पार्किंग क्षेत्र में स्थापित GD Goenka Healthcare Academy का प्रवेश मार्ग

विभव पाठक /ब्यूरो चीफ 

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर। शहर के प्रतिष्ठित ए-वन अस्पताल के बेसमेंट में संचालित GD Goenka Healthcare Academy को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों, फोटो और वीडियो के अनुसार जिस स्थान पर हेल्थकेयर एकेडमी संचालित हो रही है, वह अस्पताल के स्वीकृत मानचित्र में पार्किंग के लिए निर्धारित बताया गया है। इसके बावजूद पिछले करीब एक वर्ष से वहां शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने का मामला चर्चा में है।

मौके से प्राप्त फोटो और वीडियो में बेसमेंट के प्रवेश मार्ग पर स्पष्ट रूप से "PARKING" का संकेतक दिखाई देता है। इसी स्थान पर GD Goenka Healthcare Academy के बड़े-बड़े बोर्ड, प्रचार सामग्री और संस्थान के संचालन से जुड़े संकेत भी दिखाई देते हैं। उपलब्ध वीडियो में यह भी नजर आता है कि संस्थान तक पहुंचने के लिए बेसमेंट का उपयोग किया जा रहा है।

यदि स्वीकृत भवन मानचित्र में बेसमेंट पार्किंग के लिए निर्धारित है और उसका उपयोग किसी अन्य गतिविधि के लिए किया जा रहा है, तो यह भवन उपविधियों, पार्किंग मानकों और अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुपालन से जुड़ा विषय बन सकता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि संबंधित विभागों ने अब तक इस मामले का निरीक्षण किया या नहीं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि यह व्यवस्था पिछले लगभग एक वर्ष से संचालित है, तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA), नगर निगम, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? यदि निरीक्षण हुआ था तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है और यदि निरीक्षण नहीं हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

मामला केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में भवन मानकों के अनुपालन और नियमों के समान रूप से पालन का भी है। यदि किसी भी भवन में स्वीकृत उपयोग के विपरीत गतिविधियां संचालित हो रही हैं, तो संबंधित विभागों का दायित्व है कि वे निष्पक्ष जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करें। अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि उपलब्ध दस्तावेजों और दृश्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करता है या नहीं।