गोरखपुर में बिना फायर सुरक्षा के चल रहे ट्यूशन सेंटर, बड़े हादसे का बढ़ रहा खतरा
गोरखपुर के कई ट्यूशन और कोचिंग सेंटर बिना फायर सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे हैं। अभिभावकों ने प्रशासन से जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विभव पाठक / ब्यूरो चीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। महानगर में तेजी से बढ़ रहे ट्यूशन और कोचिंग सेंटरों की संख्या अब छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। इंजीनियरिंग, मेडिकल, पीसीएस, आईएएस तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने का दावा करने वाले अनेक संस्थान लाखों रुपये फीस वसूल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं। शहर के कई प्रमुख इलाकों में संचालित ऐसे सेंटरों में फायर सेफ्टी व्यवस्था का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है।
गोलघर, बैंक रोड, खोवा मंडी, बेतियाहाता, मोहद्दीपुर और शाहपुर समेत महानगर के कई क्षेत्रों में संचालित कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। आरोप है कि इनमें से कई संस्थान बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर एक या दो कमरों में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया जाता है, जबकि आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और अन्य सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
हाल ही में प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई दुखद घटना के बाद कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसके बावजूद शहर में कई संस्थान पहले की तरह संचालित हो रहे हैं। कुछ कोचिंग सेंटरों ने एहतियातन अपनी गतिविधियां सीमित की हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में भारी-भरकम फीस जमा करते हैं, लेकिन संस्थानों की ओर से सुरक्षा के बुनियादी इंतजामों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उनका मानना है कि शिक्षा के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और अग्निशमन विभाग से शहर के सभी कोचिंग एवं ट्यूशन सेंटरों का व्यापक निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती छात्र संख्या और सीमित स्थानों में संचालित कोचिंग संस्थानों की नियमित जांच आवश्यक है। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी आपात स्थिति में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक सतर्कता और संस्थानों की जवाबदेही दोनों जरूरी हैं।









