डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में रिकॉम्बिनेंट डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स कार्यशाला का दूसरा दिन सम्पन्न

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित रिकॉम्बिनेंट डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने ड्रग डिज़ाइन, ट्रांसक्रिप्टोमिक्स और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया।

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में रिकॉम्बिनेंट डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स कार्यशाला का दूसरा दिन सम्पन्न
डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता हुआ।

विभव पाठक / ब्यूरो चीफ

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सोसायटी फॉर प्लांट बायोकेमिस्ट्री एंड बायोटेक्नोलॉजी (SPBB), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय “पुनर्संयोजक (रिकॉम्बिनेंट) डीएनए प्रौद्योगिकी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स” प्रशिक्षण कार्यशाला का द्वितीय दिवस विविध तकनीकी व्याख्यानों और व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

कार्यशाला के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्र में प्रो. उमेश यादव, वरिष्ठ आचार्य, भौतिकी विभाग, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने “बायोमॉलिक्यूलर सिमुलेशन एंड ड्रग डिज़ाइन” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने औषधि विकास में कम्प्यूटेशनल तकनीकों, बायोमॉलिक्यूलर मॉडलिंग तथा आधुनिक ड्रग डिज़ाइन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार संगणकीय तकनीकें नई दवाओं के विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सटीक बना रही हैं।

इसके बाद प्राणिविज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने “ट्रांसक्रिप्टोमिक्स इन पर्सनलाइज्ड मेडिसिन” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने व्यक्तिगत चिकित्सा प्रणाली में ट्रांसक्रिप्टोमिक्स की भूमिका, उसके वर्तमान उपयोग तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह तकनीक रोगी की जैविक विशेषताओं के अनुरूप बेहतर उपचार पद्धति विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रही है।

व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों को पीसीआर (PCR), जेल एक्सट्रैक्शन, क्लोनिंग, सीक्वेंस एनालिसिस, BLAST, मल्टीपल सीक्वेंस अलाइनमेंट तथा फाइलोजेनेटिक ट्री कंस्ट्रक्शन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इन सत्रों का संचालन डॉ. ऐमन तनवीर, डॉ. वर्षा रानी और डॉ. पवन कुमार दोहरे द्वारा किया गया। प्रतिभागियों ने इन तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास कर आधुनिक आणविक जीवविज्ञान और बायोइन्फॉर्मेटिक्स अनुसंधान में उनके उपयोग को समझा।

कार्यशाला के संयोजक प्रो. दिनेश यादव ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को नवीनतम आणविक एवं संगणकीय जैविक तकनीकों से परिचित कराना और उनके शोध कौशल को विकसित करना है। आयोजन सचिव डॉ. पवन कुमार दोहरे ने प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा शोधार्थियों के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को उन्नत जैव प्रौद्योगिकी और बायोइन्फॉर्मेटिक्स उपकरणों एवं तकनीकों का और अधिक गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी अनुसंधान क्षमता और तकनीकी दक्षता को नया आयाम मिल सके।