सोनभद्र में नियमों को ताखपर रखकर हो रहा अवैध खनन
निष्पक्ष जन अवलोकन/अमर नाथ शर्मा सोनभद्र/सोनभद्र की धरती आज खुद सवाल कर रही है—क्या नियम सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं और अवैध खनन दिन-रात जारी रखने के लिए रास्ता खुला हुआ है? जिले के ओबरा तहसील क्षेत्र में भगवा बालू खनन को लेकर उठ रहे सवाल प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार मीतापुर बंधवा एरिया में दिन के समय भी कई मशीनों और नावों के माध्यम से धड़ल्ले से बालू निकाली जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चोपन पुल से खड़े होकर भी साफ देखा जा सकता है कि किस क्षेत्र में खनन कार्य चल रहा है। यही मार्ग जिले के बड़े-बड़े अधिकारियों के आवागमन का भी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सब कुछ खुलेआम दिखाई दे रहा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। बताया जाता है कि में० रुद्रा माइनिंग एण्ड कम्पनी के नाम संचालित मोरम खण्ड ग्राम भगवा 15 च खण्ड, तहसील ओबरा, जनपद सोनभद्र के मिनरल्स बालू साइड को लेकर विभागीय मिलीभगत की चर्चाएं भी क्षेत्र में आम हैं। सूत्रों की मानें तो कई बार पैसों की खनक के आगे नियमों की अनदेखी कर दी जाती है। एनजीटी के नियमों के अनुसार बालू खनन का समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्धारित है, लेकिन आरोप है कि अंधेरी रात में भी खनन और परिवहन का काम जारी रहता है। इससे न सिर्फ नदी के प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ रहा है, बल्कि कछुए, मछलियों और घड़ियाल जैसे जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट मंडरा रहा है। कागज़ों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने और तय सीमा के भीतर खनन की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। कई स्थानों पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही और बिना कांटे के गाड़ियों का आना-जाना राजस्व को भी नुकसान पहुंचा सकता है। क्षेत्र में बालू से भरे वाहनों की लंबी कतारें यह संकेत देती हैं कि कहीं न कहीं नियमों का पालन प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा। चोपन-भरहरी मार्ग पर बालू साइड से निकलते ही एक प्राथमिक विद्यालय भी स्थित है। ऐसे में तेज रफ्तार बालू लदे वाहनों की आवाजाही बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो कभी भी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर उठता है। यदि तय नियमों से अधिक खनन और अवैध परिवहन हो रहा है, तो इससे सरकारी राजस्व को भारी क्षति के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचना तय है। ऐसे मामलों से प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता के दावों पर भी सवाल खड़े होते हैं। यदि किसी प्रभावशाली नाम के सहारे बेखौफ होकर अवैध खनन किया जा रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और यदि कहीं भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। कानून का राज तभी स्थापित होगा जब नियमों का पालन बिना किसी दबाव या प्रभाव के किया जाए। अब सवाल जनता के मन में है—क्या सोनभद्र में कानून का शासन मजबूत होगा या फिर अवैध खनन का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?









