राजा परीक्षित-शुकदेव संवाद सुन भक्ति में डूबे श्रद्धालु
खेरागढ़। सरेंधी स्थित बाबा की धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। कथा व्यास विजयराम कौशिक महाराज ने अमर कथा, शुकदेव जी महाराज के जन्म तथा राजा परीक्षित के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भगवान के जयकारे लगाते रहे और भक्ति गीतों पर झूम उठे।कथावाचक ने कहा कि कलियुग के जीवों के कल्याण के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने शुकदेव जी महाराज को श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रचार-प्रसार का दायित्व सौंपा था। उन्होंने शुकदेव जी द्वारा कैलाश पर्वत पर भगवान शिव से माता पार्वती को सुनाई जा रही भागवत कथा का श्रवण करने का प्रसंग सुनाते हुए उनकी महान तपस्या और ज्ञान का वर्णन किया।लाल कथा के दौरान राजा परीक्षित को मिले श्राप और सातवें दिन सर्पदंश से मृत्यु निश्चित होने के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। महाराज ने बताया कि मृत्यु का सत्य जानने के बाद राजा परीक्षित ने राजपाट और सांसारिक मोह का त्याग कर मोक्ष का मार्ग चुना तथा शुकदेव जी महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। भागवत कथा मनुष्य को भक्ति, वैराग्य और मोक्ष की ओर प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि इस संसार में जन्म लेने वाले प्रत्येक प्राणी की मृत्यु निश्चित है, लेकिन जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भागवत कथा का श्रवण कर उसके उपदेशों को अपने जीवन में अपनाता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। कथा सुनने से मनुष्य के पापों का नाश होता है और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और कथा व्यास का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान परीक्षित ओमप्रकाश सिंह, माया देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।









