विश्व पर्यावरण दिवस पर परिषदीय विद्यालयों में चला ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान
निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट। शासन के निर्देशानुसार बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित जिले के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नवागत बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) रंजना शुक्ला के निर्देशन में शिक्षकों और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसी क्रम में पीएमश्री कंपोजिट विद्यालय कछार पुरवा में प्रधानाध्यापिका रचना यादव, शिक्षक विद्यासागर सिंह तथा नीलम के नेतृत्व में विद्यालय परिसर स्थित पोषण वाटिका में फलदार पौधों का रोपण किया गया। विद्यालय की पोषण वाटिका और हर्बल वाटिका विद्यार्थियों तथा ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विद्यालय की हर्बल वाटिका में विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जिनमें लौंग, तेजपत्ता, इलायची, शतावर, मीठी नीम, पुदीना, पत्थरचट्टा सहित कई अन्य औषधीय प्रजातियां शामिल हैं। वहीं पोषण वाटिका में आम, अमरूद, अनार, नींबू, केला जैसे फलदार पौधों के साथ-साथ बैंगन, चौराई, भिंडी, पालक, लौकी सहित विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती की जा रही है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार इन पौधों की नियमित देखभाल और सिंचाई का कार्य शिक्षक विद्यासागर सिंह तथा रसोइया नीलम द्वारा किया जाता है। यही कारण है कि भीषण गर्मी के बावजूद विद्यालय की पोषण वाटिका और हर्बल वाटिका हरी-भरी एवं विकसित अवस्था में दिखाई दे रही हैं। वहीं कंपोजिट विद्यालय कौहारी में प्रधानाध्यापक सोमनाथ ने शिक्षकों और ग्रामीणों के सहयोग से पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित कराया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया गया। इसके अलावा जिले के अन्य परिषदीय विद्यालयों में भी प्रधानाध्यापकों के नेतृत्व में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण कार्यक्रम संपन्न हुए। शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों ने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य का संकल्प लिया। प्रधानाध्यापिका रचना यादव ने कहा कि विद्यालय की पोषण एवं हर्बल वाटिका बच्चों को प्रकृति, पोषण और औषधीय पौधों के महत्व से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि पौधों की नियमित देखभाल से बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित होती है। प्रधानाध्यापक सोमनाथ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान न केवल प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की।









