पचपेड़वा में कथित निजी क्लिनिक पर गंभीर सवाल, गर्भवती महिला व नवजात की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश
निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेड़वा (बलरामपुर)। नगर पंचायत पचपेड़वा के जूड़ी कुइयां चौराहा स्थित एक कथित निजी क्लिनिक को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्लिनिक का संचालन नियमों की अनदेखी कर किया जा रहा था। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 28 मई की सुबह लगभग 5 बजे क्षेत्र निवासी सुरेश की पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों का कहना है कि महिला को इलाज के लिए उक्त क्लिनिक ले जाया गया। आरोप है कि वहां रक्त की व्यवस्था करने के लिए दो यूनिट खून की मांग की गई। परिजनों ने भागदौड़ कर रक्त की व्यवस्था भी की, लेकिन उपचार के दौरान गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मृत्यु हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्लिनिक का संचालन डॉ. सिद्धार्थ और आरिफ की साझेदारी में किया जा रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद मामले को दबाने का प्रयास किया गया तथा परिजनों को कुछ आर्थिक सहायता देकर शांत कराने की कोशिश की गई। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि परिजनों से कुछ सादे कागजों पर हस्ताक्षर अथवा लिखित बयान लिया गया, जिसमें अस्पताल में किसी प्रकार की घटना न होने जैसी बातें दर्ज कराई गईं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो भविष्य में अन्य परिवारों के साथ भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कथित क्लिनिक के संचालन, चिकित्सकीय व्यवस्था और पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। आरोप है कि सीएचसी/सीएमओ कार्यालय के संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क किया गया, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। एक अधिकारी ने मामले को दूसरे अधिकारी के अधिकार क्षेत्र का बताते हुए पल्ला झाड़ लिया, जबकि पचपेड़वा के अधीक्षक से संपर्क करने पर भी घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। घटना के बाद क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी चिकित्सकीय लापरवाही के कारण महिला और नवजात की जान गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।









