टेक्सटाइल प्रशिक्षण के बाद 300 लाभार्थियों का मूल्यांकन, आत्मनिर्भरता पर जोर
निष्पक्ष जन अवलोकन नूर मोहम्मद मसौली (बाराबंकी)। एक जनपद एक उत्पाद योजना के तहत गत जनवरी माह में गांधी आश्रम में आयोजित 10 दिवसीय टेक्सटाइल प्रशिक्षण के बाद चार दिवसीय मूल्यांकन शिविर का आयोजन पंचायत भवन, बड़ागांव में यूपीकान के तत्वावधान में किया गया। शिविर में टेक्सटाइल क्षेत्र के लगभग 300 लाभार्थियों ने प्रतिभाग किया, जिनका लिखित एवं प्रायोगिक मूल्यांकन किया गया। मूल्यांकन के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक, कौशल उन्नयन तथा निःशुल्क टूलकिट के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की जानकारी दी गई। मूल्यांकन के दौरान हैंडलूम पर वार्पर बीम, गैटिंग प्रक्रिया, हथकरघा की गति, वीवर्स बीम की जांच, शेड निर्माण, ताने के धागों की लंबाई तथा शटल की स्थिति आदि बिंदुओं पर विशेष रूप से परीक्षण किया गया। शिविर का संचालन प्रभारी इरम सबा की देखरेख में हुआ, जिसमें राहुल कुमार, अबुबकर, राकेश कुमार एवं बिल्कीस द्वारा लाभार्थियों का मूल्यांकन किया गया। प्रभारी इरम सबा ने बताया कि एक जनपद एक उत्पाद योजना का उद्देश्य जिले के पारंपरिक शिल्प, कला और कृषि उत्पादों को पहचान दिलाकर स्थानीय कारीगरों को रोजगार उपलब्ध कराना, उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। साथ ही, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाकर निर्यात को बढ़ावा देना भी इस योजना का लक्ष्य है।









