गोरखपुर आम महोत्सव 2026: पूर्वांचल की पारंपरिक आम प्रजातियों के संरक्षण की पहल
गोरखपुर क्लब में 21 जून को आयोजित आम महोत्सव में आम प्रदर्शनी, विशेषज्ञ परिचर्चा, रेसिपी प्रतियोगिता और स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा होगी।
विभव पाठक /ब्यूरो चीफ
निष्पक्ष जन अवलोकन
गोरखपुर। पूर्वांचल की पारंपरिक आम प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) गोरखपुर अध्याय की ओर से 21 जून को गोरखपुर क्लब सभागार में चतुर्थ "गोरखपुर आम महोत्सव" का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव केवल आम की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र की कृषि परंपरा, जैव विविधता, स्थानीय स्वाद और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण अभियान भी बनेगा।
इंटेक गोरखपुर के संयोजक महावीर कंदोई ने बताया कि पूर्वांचल सदियों से आम उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र रहा है। यहां की कई पारंपरिक आम प्रजातियां अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और स्थानीय पहचान के लिए जानी जाती रही हैं, लेकिन समय के साथ व्यावसायिक प्रजातियों के बढ़ते प्रभाव से अनेक स्थानीय किस्में विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही हैं। इन्हीं प्रजातियों को बचाने और उनके महत्व को समाज के सामने लाने के लिए वर्ष 2023 में आम महोत्सव की शुरुआत की गई थी।
महोत्सव का पहला सत्र दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक तकनीकी परिचर्चा के रूप में आयोजित होगा। इसमें "पूर्वी उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में आम : विविधता एवं उत्पादन" विषय पर चर्चा होगी। आईसीएआर रहमानखेड़ा, लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष यादव, जिला उद्यान अधिकारी पारसनाथ, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव तथा डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की डॉ. अनुपमा कौशिक आम उत्पादन, संरक्षण, रोग-कीट प्रबंधन, प्रसंस्करण और पोषण संबंधी विषयों पर जानकारी देंगे।
इसके अलावा क्षेत्र के प्रमुख आम उत्पादक डॉ. शिवशरण दास, नुशरत अब्बासी, शिवेंद्र विक्रम सिंह और श्रीमती तलत अजीज अपने अनुभव साझा करेंगे। दोपहर 2:30 बजे से शुरू होने वाले दूसरे सत्र में विभिन्न आम प्रजातियों और आम से बने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। गृहणियां और उद्यमी आम आधारित व्यंजनों का प्रदर्शन एवं विक्रय भी करेंगे। इस अवसर पर आम से तैयार पारंपरिक और नवाचारपूर्ण व्यंजनों की रेसिपी प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी।
आयोजन को सफल बनाने में अचिंत्य लहरी, डॉ. मुमताज खान, प्रो. शिवशरण दास, महावीर कंदोई और नीरज अस्थाना की सक्रिय भूमिका रही है। महोत्सव में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। आयोजकों ने आमजन से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पूर्वांचल की आम विरासत को संरक्षित करने के इस अभियान में सहभागी बनने की अपील की है।









