लेखपाल पर भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप, दिव्यांग युवक ने लगाई न्याय की गुहार

निष्पक्ष जन अवलोकन विजय राम जायसवाल फतेहपुर (बाराबंकी)। कस्बा क्षेत्र में तैनात लेखपाल पर एक पत्रकार के माध्यम से भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उच्च अधिकारियों को भेजे गए शिकायती पत्र में दिव्यांग युवक संजय कुमार शर्मा ने कस्बे की लेखपाल नलिनी तिवारी पर रिश्वत मांगने, फर्जी आख्या रिपोर्ट लगाने और मामले को जानबूझकर लंबित रखने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित के अनुसार, उसकी माता के निधन के बाद उसकी पैतृक भूमि का नाम खतौनी में दर्ज तो कर दिया गया, लेकिन आज तक उसका विधिवत अंश निर्धारण नहीं किया गया है। इस संबंध में उसने 13 फरवरी 2026 को एसडीएम (उपजिलाधिकारी) को आवेदन दिया था, लेकिन कई माह बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सबसे गंभीर आरोप यह है कि लेखपाल शालिनी तिवारी ने अंश निर्धारण के नाम पर पीड़ित से सुविधा शुल्क की मांग की। पीड़ित का कहना है कि जब उसने पैसे देने से इनकार किया, तो लेखपाल ने जानबूझकर फर्जी व भ्रामक आख्या रिपोर्ट तैयार कर अधिकारियों को गुमराह कर दिया। आरोप है कि रिपोर्ट में वास्तविक तथ्यों को छिपाकर मामले को उलझाने का प्रयास किया गया, जिससे पीड़ित लगातार न्याय से वंचित हो रहा है। लेखपाल द्वारा बार-बार उच्चाधिकारियों को गलत जानकारी देकर कार्रवाई प्रभावित करने की भी बात सामने आ रही है। पीड़ित ने मामले की शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर भी की, लेकिन वहां भी लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर निस्तारण कर दिया गया, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले का एक अन्य पहलू यह भी है कि लेखपाल की लापरवाही के चलते पीड़ित को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वर्ष 2022 में किसान सम्मान निधि हेतु आवेदन करने के बावजूद उसे अब तक लाभ नहीं मिला, जबकि फार्मर रजिस्ट्री और गोल्डन कार्ड भी लंबित बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लेखपाल शालिनी तिवारी वर्ष 2017 से इसी क्षेत्र में तैनात हैं और लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण उनकी कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। प्रशासन मौन, कार्रवाई का इंतजार इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक आम जनता को न्याय के लिए भटकना पड़ेगा। पीड़ित ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा उसकी भूमि का अंश निर्धारण जल्द पूरा कर उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।