टोल प्लाजा विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों को मिली राहत

निष्पक्ष जन अवलोकन विनय सिंह बाराबंकी। जनवरी माह में हैदरगढ़ के गोटौना टोल प्लाजा (लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे) पर अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला व टोल कर्मियों के बीच हुए विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपियों को बड़ी राहत दी है, साथ ही कई निर्देश भी जारी किए हैं। जस्टिस विक्रम नाथ व जस्टिस संदीप मेहता की डबल बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए जेल में बंद टोल कर्मियों को मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही डीजीपी उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया गया कि आरोपियों की रिहाई के समय उन्हें सुरक्षा (एस्कॉर्ट) उपलब्ध कराई जाए। डबल बेंच ने यह भी आदेश दिया कि इस मुकदमे की सुनवाई अब बाराबंकी की अदालत के बजाय दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन की भूमिका की निंदा करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया व उत्तर प्रदेश को पत्र भेजने के निर्देश भी दिए हैं। विवाद के बाद प्रदर्शन और वकीलों का विरोध, पैरवी करने पर हुआ हमला बताते चलें कि प्रतापगढ़ जिले के अधिवक्ता रत्नेश शुक्ला 14 जनवरी को लखनऊ की ओर जा रहे थे, तभी हैदरगढ़ स्थित गोटौना टोल प्लाजा पर टोल शुल्क को लेकर उनका विवाद टोल कर्मियों से हो गया था। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद कई जिलों के अधिवक्ताओं ने टोल प्लाजा पर प्रदर्शन किया। यूपी बार काउंसिल का चुनाव लड़ रहे कई उम्मीदवार भी मौके पर पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने लवलेश, रवि तोमर, गोलू व विश्वजीत सहित 10 अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नामित आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अधिवक्ताओं के दबाव के चलते आरोपियों की पैरवी के लिए कोई वकील तैयार नहीं था। बाद में 5 फरवरी 2026 को बाराबंकी के अधिवक्ता मनोज शुक्ला ने आरोपियों की ओर से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट-17 में वकालतनामा व जमानत याचिका दाखिल की। इसकी जानकारी मिलते ही सैकड़ों अधिवक्ताओं ने उनकी सीट पर धावा बोलकर नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद मनोज शुक्ला ने पैरवी से इंकार कर दिया।