मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद बाराबंकी में बेसमेंट में संचालित अस्पतालों पर नहीं लग रही रोक, मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद बाराबंकी में बेसमेंट में संचालित अस्पतालों पर नहीं लग रही रोक, मरीजों की सुरक्षा पर उठे सवाल

निष्पक्ष जन अवलोकन

रत्नाकर पांडेय

टिकैतनगर/बाराबंकी। राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेशभर में फायर सेफ्टी ऑडिट तथा निजी अस्पतालों की सघन जांच के निर्देश जारी किए गए थे। शासन ने स्पष्ट रूप से बेसमेंट में संचालित अस्पतालों, ओपीडी एवं कोचिंग संस्थानों पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद बाराबंकी जिले के कई क्षेत्रों में बेसमेंट में अस्पतालों का संचालन जारी होने से मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार पूरेडलई ब्लॉक के सरायबरई, नियामतगंज सहित कई स्थानों पर ऐसे निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जहां पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन निकासी के समुचित इंतजाम नहीं हैं। कई अस्पतालों में प्रवेश और निकास का केवल एक ही रास्ता होने की बात सामने आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आग अथवा किसी अन्य आपदा की स्थिति में गंभीर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद कठिन हो सकता है, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

स्वास्थ्य विभाग के नियमानुसार अस्पताल संचालन के लिए वैध पंजीकरण, भवन संबंधी मानकों का पालन तथा अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अनिवार्य है। इसके बावजूद आरोप हैं कि कुछ अस्पताल बिना आवश्यक सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ अस्पतालों का पंजीकरण समाप्त हो चुका है अथवा उनका नवीनीकरण नहीं कराया गया है, फिर भी वहां मरीजों का उपचार और भर्ती का कार्य जारी है।

बताया जाता है कि जिले में लगभग 320 पंजीकृत निजी अस्पताल हैं, लेकिन इनमें से कितने अस्पताल बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं, इसका स्पष्ट ब्यौरा विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि शिकायत मिलने पर कई मामलों में केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, जिससे नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि निजी अस्पतालों की जांच के लिए तीन सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसमें एसीएमओ डॉ. संजय बाबू, डॉ. एल.बी. गुप्ता तथा एक फायर सेफ्टी अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि टास्क फोर्स 30 जून तक अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किन-किन अस्पतालों में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है। यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो संबंधित अस्पतालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच निष्पक्ष एवं प्रभावी होनी चाहिए ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।