छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा: बंद पड़े पुस्तकालयों को खोलने की मांग पर प्रदर्शन

निष्पक्ष जन अवलोकन बाराबंकी, 06 अप्रैल: जनपद में बंद पड़े सरकारी और सार्वजनिक पुस्तकालयों को पुनः संचालित करने की मांग को लेकर सोमवार को ‘पुस्तकालय पुनरुद्धार समिति’ के बैनर तले दर्जनों युवाओं और छात्रों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। समिति के अध्यक्ष अम्बरीष कुमार के नेतृत्व में पहुंचे छात्रों ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर पुस्तकालयों की बदहाली पर गहरा रोष व्यक्त किया। ज्ञापन सौंपते हुए अम्बरीष कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम-2006 लागू होने के बावजूद जनपद के अधिकांश पुस्तकालय संसाधनों के अभाव में बंद पड़े हैं। ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के मेधावी छात्र, जो प्राइवेट लाइब्रेरी की भारी फीस नहीं भर सकते, उनके लिए सरकारी पुस्तकालय ही एकमात्र सहारा हैं। पुस्तकालयों के बंद होने से हजारों छात्रों की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो रही है। छात्रों ने मांग की कि सभी बंद पड़े जिला और राजकीय पुस्तकालयों को तत्काल खोला जाए, रिक्त लाइब्रेरियन और सहायक पदों पर स्थायी नियुक्तियां की जाएं, पुरानी पुस्तकों के स्थान पर नई और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें उपलब्ध कराई जाएं तथा पुस्तकालयों को डिजिटल सुविधाओं और इंटरनेट से लैस किया जाए। समिति ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो छात्र संगठन उग्र आंदोलन और अनशन करने को बाध्य होगा। इस दौरान कई प्रतियोगी छात्र मौजूद रहे।