कोटियार नाला पर भू-माफियाओं की नजर नाले का समतलीकरण कर प्लाटिंग की तैयारी

कोटियार नाला पर भू-माफियाओं की नजर नाले का समतलीकरण कर प्लाटिंग की तैयारी
कोटियार नाला पर भू-माफियाओं की नजर नाले का समतलीकरण कर प्लाटिंग की तैयारी

निष्पक्ष जन अवलोकन। । शिवसंपत करवरिया। चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में एक बार फिर भू-माफियाओं की सक्रियता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड क्रमांक-4 स्थित सियाराम कुटीर के सामने वाली गली में स्थित कोटियार नाला की भूमि पर कथित अतिक्रमण और समतलीकरण का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि नाले की भूमि को समतल कर वहां प्लाटिंग की तैयारी की जा रही है, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। जानकारी के अनुसार, कोटियार नाला की आराजी क्रमांक 45/1/23/3, रकबा 0.6270 हेक्टेयर के अंश भाग पर भारी मशीनों के माध्यम से समतलीकरण कार्य किए जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस भूमि का स्वरूप राजस्व अभिलेखों में नाले के रूप में दर्ज है, वहां तेजी से मिट्टी भराई और समतलीकरण का कार्य किया जा रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि समतलीकरण के पीछे भूमि को आवासीय या व्यावसायिक प्लाटों में तब्दील करने की तैयारी की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि नाले के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ की गई तो बरसात के दौरान पानी निकासी बाधित हो सकती है, जिससे आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कब्जे की यह कोशिश भविष्य में पर्यावरणीय और नागरिक समस्याओं का कारण बन सकती है। उनका कहना है कि प्रशासन को तत्काल मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब संबंधित भू-स्वामी द्वारा लिखित शिकायत के माध्यम से प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों द्वारा सरकारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कब्जा कर आर्थिक लाभ अर्जित करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भूमि के स्वरूप में परिवर्तन किन परिस्थितियों में किया जा रहा है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नाले की भूमि पर चल रहे कथित समतलीकरण कार्य की जानकारी संबंधित विभागों को है या नहीं। यदि जानकारी है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि जानकारी नहीं है तो निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राजस्व विभाग, नगर परिषद और अन्य संबंधित अधिकारियों को मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच करानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण या अतिक्रमण को रोका जा सके। कोटियार नाला प्रकरण को लेकर क्षेत्रीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यह मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों पर कथित कब्जे का गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में अन्य सार्वजनिक भूमि भी भू-माफियाओं के निशाने पर आ सकती है। फिलहाल, ईडी जांच की मांग के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।