पचपेड़वा ब्लॉक से महज 3 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत सिसहनिया घोपलापुर में विकास कार्यों के नाम पर बड़ा घोटाला उजागर, ग्रामीणों ने की जांच की मांग
निष्पक्ष जन अवलोकन। ब्यूरो न्यूज़। पचपेड़वा विकासखंड जनपद बलरामपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत सिसहनिया घोपलापुर में सरकारी धन के खुलेआम दुरुपयोग और फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में लगभग डेढ़ लाख रुपये की लागत से चार कैटल शेड निर्माण कार्य कराया गया, लेकिन आज तक कोई भी निर्माण कार्य पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया। कहीं प्लास्टर अधूरा पड़ा है, कहीं पेंटिंग नहीं हुई है, तो कहीं छत पर चद्दर तक नहीं लगाया गया है। कई निर्माण कार्य आधे-अधूरे हाल में छोड़ दिए गए, जबकि सरकारी अभिलेखों में पूरा भुगतान दिखाकर धन निकासी कर ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम निधि और मनरेगा के पैसों का बड़े पैमाने पर फर्जी भुगतान किया गया है। बिना कार्य कराए कागजों में काम पूरा दिखाकर सरकारी धन निकाल लिया गया। गांव में विकास कार्य धरातल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। आरोप है कि ग्राम निधि का पैसा बंदरबांट कर लिया गया और विकास केवल कागजों तक सीमित रह गया। ग्रामीणों ने प्रधान मोहम्मद शब्बीर हसन, प्रधान प्रतिनिधि जुबेर अहमद और सचिव सौरभ श्रीवास्तव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि प्रधान के फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए भुगतान किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान को ग्राम पंचायत के कार्यों की सही जानकारी तक नहीं है और पांच वर्षों के कार्यकाल में एक भी खुली बैठक नहीं हुई। केवल कागजों में खानापूर्ति कर योजनाओं को पूरा दिखाया गया। सूत्रों के अनुसार मनरेगा के तहत बिना काम कराए मजदूरों के नाम पर भुगतान कर दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधान प्रतिनिधि जुबेर अहमद ने दबंगई और प्रभाव के दम पर पूरे ग्राम पंचायत तंत्र को अपने कब्जे में कर रखा है, जिससे कोई खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा है। संवाददाता द्वारा सचिव सौरभ श्रीवास्तव से दूरभाष पर संपर्क किए जाने पर उन्होंने कथित रूप से अभद्र व्यवहार करते हुए कहा कि “तुम्हारा पैसा है क्या जो पूछ रहे हो।” वहीं संबंधित अधिकारी मोहित दुबे को फोन किया गया, लेकिन घंटी बजने के बाद भी फोन रिसीव नहीं हुआ। गौरतलब है कि 12 मई को भी इस मामले को लेकर खबर प्रकाशित की गई थी, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से पूरे ग्राम पंचायत के विकास कार्यों और भुगतान की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो ग्राम पंचायत में कई और फर्जी भुगतान के मामले सामने आ सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस ग्राम पंचायत में ब्लॉक मुख्यालय स्थित है, वहीं खुलेआम भ्रष्टाचार और सरकारी धन की लूट हो रही है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं। आखिर सरकार ऐसे भ्रष्ट प्रधानों और अधिकारियों पर लगाम कब लगाएगी?









