कोटेदारों की मनमानी से गरीब बेहाल, अंत्योदय परिवारों का राशन हड़पने का आरोप
निष्पक्ष जन अवलोकन। पचपेडवा विकासखंड, जनपद बलरामपुर में कोटेदारों की मनमानी से गरीब और अंत्योदय कार्ड धारक परिवार गंभीर संकट में हैं। ग्राम पंचायत सदवा नगर और बरगदवा सैफ से सामने आई शिकायतों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा मिलने वाला राशन और अन्य खाद्य सामग्री कोटेदारों द्वारा पूरा नहीं दिया जा रहा, जिससे गरीब परिवारों को भूखे पेट सोने की नौबत आ रही है। ग्राम पंचायत सदवा नगर में कोटेदार श्याम बहादुर पर ग्रामीणों ने गंभीर हेराफेरी के आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि अंत्योदय कार्ड धारकों को हर महीने निर्धारित मात्रा से कम, लगभग 20 किलो राशन ही दिया जाता है, जबकि शेष राशन गायब कर दिया जाता है। वहीं, हर तीन महीने पर मिलने वाली चीनी भी केवल 1 किलो दी जाती है और उसमें भी ओवर रेटिंग की जाती है। पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों को प्रति यूनिट 5 किलो राशन मिलने का प्रावधान है, लेकिन यहां प्रति यूनिट केवल 2 किलो ही दिया जा रहा है, जिसमें 1 किलो गेहूं और 1 किलो चावल शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगवा लिया जाता है और बाद में मनमाने तरीके से कम राशन दिया जाता है। इसी तरह ग्राम पंचायत बरगदवा सैफ में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां अंत्योदय कार्ड धारकों को केवल 25 किलो राशन देकर बाकी हजम कर लिया जाता है। पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों के राशन में भी प्रति यूनिट 2 किलो तक की कटौती की जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रभावशाली लोगों और तथाकथित छोटे नेताओं के दबाव में शिकायत करने वालों को धमकाया जाता है, जिससे लोग खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस घोटाले के चलते कई गरीब परिवारों को पेट भर भोजन नहीं मिल पा रहा है और उन्हें भूखे पेट सोना पड़ रहा है। 18 अप्रैल से 22 अप्रैल तक निष्पक्ष जन अवलोकन द्वारा लगातार इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। संवाददाता द्वारा दूरभाष पर सप्लाई इंस्पेक्टर जितेंद्र से संपर्क किया गया, तो उन्होंने केवल जांच का आश्वासन दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कोटेदार श्याम बहादुर खुलेआम कहता है कि “खबर छापते रहो, कुछ फर्क नहीं पड़ेगा”, जिससे अधिकारियों और कोटेदार के बीच मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करता है और क्या गरीबों को उनका हक मिल पाएगा या नहीं।









