अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार में हुआ सामूहिक योगाभ्यास

गोरखपुर के सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग शिविर आयोजित हुआ। विशेषज्ञों ने योग के महत्व और लाभ बताए।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार में हुआ सामूहिक योगाभ्यास
सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार, राप्तीनगर गोरखपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित सामूहिक योगाभ्यास में भाग लेते आचार्य, अतिथि एवं अन्य प्रतिभागी।

विभव पाठक / ब्यूरो चीफ 

निष्पक्ष जन अवलोकन 

गोरखपुर। सरस्वती शिशु मंदिर रेलविहार (10+2), राप्तीनगर, गोरखपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर शनिवार को विशेष कार्यक्रम एवं योग शिविर का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के आचार्यों, आचार्याओं, अभिभावकों तथा प्रबुद्ध नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ।

कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराते हुए अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत एवं सम्मान किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसिद्ध श्लोक “योगः कर्मसु कौशलम्” की व्याख्या करते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक और कुशलतापूर्वक निर्वहन करना भी योग का ही स्वरूप है।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का अपने शिक्षण कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण, विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में योगदान तथा राष्ट्र निर्माण की भावना से कार्य करना सच्ची ईश्वर आराधना है। गीता का संदेश हमें निष्काम भाव से कर्म करने और अपने दायित्वों को साधना के रूप में स्वीकार करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी आचार्यों से शिक्षा को केवल आजीविका का माध्यम न मानकर समाज और राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता पद से सेवानिवृत्त हीरा लाल कुशवाहा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उनका अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त प्रवक्ता कृष्णा सिंह का भी विद्यालय परिवार द्वारा स्वागत किया गया।

अपने संबोधन में हीरा लाल कुशवाहा ने योग के प्राचीन इतिहास, भारतीय संस्कृति में उसके महत्व तथा वर्तमान जीवन में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव शरीर पंचतत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—से निर्मित है तथा इन तत्वों के संतुलन को बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम योग है। योग व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ बनाता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

इसके बाद आयोजित व्यावहारिक सत्र में योग प्रशिक्षक सुश्री शैल एवं रवि श्रीवास्तव के निर्देशन में सामूहिक योगाभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, सूर्य नमस्कार सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया। साथ ही अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम की विधियां भी सीखीं। प्रशिक्षकों ने प्रत्येक आसन एवं प्राणायाम के स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देते हुए नियमित योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह दी।

संपूर्ण कार्यक्रम अनुशासित, उत्साहपूर्ण एवं योगमय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन जयंती एवं मीडिया प्रमुख आचार्य प्रेम सागर त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त आचार्य-आचार्याएं, अभिभावक एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।