अखिल भारतीय कवि सम्मेलन से नव संवत्सर महोत्सव का शुभारंभ

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन से नव संवत्सर महोत्सव का शुभारंभ

निष्पक्ष जन अवलोकन विनय सिंह बाराबंकी। नव संवत्सर महोत्सव की शुरुआत मंगलवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ हुई। नगरपालिका प्रांगण में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देशभर से आए नामचीन रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर रात तक व्यंग्य, ओज, श्रृंगार एवं हास्य रस का भरपूर आनंद लेते रहे। शाम से शुरू हुई काव्य महफिल आधी रात तक निरंतर जारी रही। कवि सम्मेलन का कुशल संचालन ओज कवि अभिजीत मिश्रा ने किया, जबकि अध्यक्षता जिला संघ चालक डॉ. आर.एस. गुप्ता ने की। वीर रस के कवि योगेंद्र शर्मा ने अपनी ओजपूर्ण कविता प्रस्तुत करते हुए कहा— “मैं रश्मिरथी का कालचक्र, रुक जाना मेरा कर्म नहीं, स्थितप्रज्ञ हिमालय जैसा हूँ, झुक जाना मेरा धर्म नहीं। दुर्धर्ष राष्ट्र का समुत्कर्ष, अभियान कदापि रुके नहीं, सूरज में जब तक ताप रहे, भारत का मस्तक झुके नहीं।” दिल्ली से पधारे मनवीर मधुर ने श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण चित्रण किया, जबकि जबलपुर के सुदीप भोला ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा— “जाति का ना पाति का घमंड रखना, हिंदुओं की एकता अखंड रखना… कट जाएंगे मगर बटेंगे नहीं।” अभिजीत मिश्रा ने युवाओं को हास्य-व्यंग्य से गुदगुदाया, वहीं डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने श्रीराम के गुणों का काव्यात्मक वर्णन प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश के रीवा से आए हास्य कवि कामता माखन ने अपने व्यंग्य से श्रोताओं को खूब हंसाया। शिवेश राजा ने सामाजिक मूल्यों पर प्रभावशाली कविता सुनाई। संजय सांवरा ने श्रृंगार रस में कहा— “मोम था या कि फौलाद क्या देखते, तेरे दीदार के बाद क्या देखते। रात पूनम की थी यह तो सच है मगर, आप थे सामने चांद क्या देखते।” प्रियांशु गजेंद्र ने जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाते हुए कहा— “फूलों के दिन, शूलों के दिन, गुड़हल और बबूलों के दिन सबके आते हैं, दिन से क्या घबराना, दिन तो आते-जाते हैं।” इस अवसर पर विभाग संघ चालक गंगा बक्स सिंह, जिला प्रचारक रवि प्रकाश, जिला कार्यवाह सुधीर, सह जिला कार्यवाह पारितोष, भाजपा जिला अध्यक्ष राम सिंह वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।