*भाजपा के लिए विपक्ष से बड़े खलनायक हैं महंगे पेट्रोलियम पदार्थ व खाद्य तेल
*जल्द ना लगा महंगाई पर ब्रेक तो भाजपा को 2022 में चुकानी पड़ सकती है इसकी भारी कीमत ?
*भाजपा सरकार में भजन ठीक लेकिन भोजन पर भारी आघात!

निष्पक्ष जन अवलोकन।
कृष्ण कुमार द्विवेदी(राजू भैया)।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र बनारस में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की। जिसे सुनकर भाजपाई फूले न समाए। लेकिन कड़वे सत्य का एक पहलू और भी है! जिसे भाजपा के कर्णधारों को नजदीक से समझना होगा। जी हां वह है महंगाई! यदि इस पर ब्रेक ना लगा तो भाजपा को 2022 के चुनाव में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। क्योंकि कि मोदी जी योगी जी तो ठीक है! लेकिन महंगाई महाखराब है?????
बनारस को 15000 करोड रुपए की परियोजनाओं का तोहफा देने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की शान में जमकर कसीदे पढ़े। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने माफिया व अपराधियों को जमकर सबक सिखाया तो वही कोरोना महामारी से भी यादगार संघर्ष किया। प्रधानमंत्री ने यूपी में निवेश सहित अन्य कई मामले को लेकर मुख्यमंत्री की पीठ थपथपाई। इसके साथ ही उन्होंने सपा पर अप्रत्यक्ष रूप से सियासी हमला भी किया। प्रधानमंत्री के द्वारा मुख्यमंत्री की ,की गई तारीफ की चर्चा आम जनता तक पहुंची। जिसके बाद उठे विचार मंथन के बवंडर से जो असलियत सामने आई वह भाजपा को सतर्क करने वाली है? आम जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मुख्यमंत्री योगी की तारीफ को स्वीकार करती है! लेकिन उसे महंगाई बिल्कुल स्वीकार नहीं है?
महंगाई ने आम जनता को बेहाल कर रखा है। खास बात यह है कि महंगाई का जिन्न केंद्र सरकार की वजह से पांव पसार रहा है? चाहे वह गैस सिलेंडर हो या फिर पेट्रोल हो अथवा डीजल! इन पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई ने पूरे देश में महंगाई की सफलता को पंख लगा दिए हैं। खाद्य तेलों में सरसों का तेल हो या फिर डालडा अथवा रिफाइंड यह भी महंगाई का ही गाना गा रहे हैं? चाय की पत्ती के सहित शायद ही ऐसा कोई खाद्य पदार्थ हो जो इस समय महंगा ना हो! स्पष्ट है कि एक साधारण आदमी की रसोई का बजट बिगड़ चुका है! उसकी संतुलित भोजन की थाली पर प्रश्न चिन्ह है। परिवार का मुखिया इस बढ़ी महंगाई पर खुलकर मोदी सरकार एवं योगी सरकार को कोसता है? अवसरवादी, चापलूस अथवा दरबारी भले ही भाजपा नेताओं के बड़े दरबारों में बैठकर यह बातें करें कि सब अमन-चैन है। भाजपा को सत्ता से कोई नहीं हटा सकता? लेकिन सत्यता का दूसरा पहलू यह है कि महंगाई विपक्ष से बड़ी खलनायक भाजपा के लिए साबित होनी तय है? आम जनमानस में महंगाई को लेकर आक्रोश है! वह सत्ता के रहते भले ही भाजपा के सामने ना आए! लेकिन मतदान के दिन वोट के जरिए वह भाजपा को सबक सिखा सकता है?
गरीब, मध्यमवर्गीय परिवार की हालत इस महंगाई में क्या है इसका अनुमान वातानुकूलित कमरों में अथवा हवाई जहाज पर उड़कर नहीं लगाया जा सकता? केवल मोदी -मोदी केवल भाजपा- भाजपा करके भी नहीं लगाया जा सकता ?इसका अंदाजा छोटे-मोटे धंधे करके, ठेला खोमचा लगाकर अथवा मजदूरी करके ही लगाया जा सकता है? कि कम कमाई में बड़े परिवार का पालन पोषण कैसे किया जाए! खाद्य तेलों की महंगाई ने तो गरीब के भोजन थालों से नमक- रोटी- तेल की परिभाषा को भी बदल डाला है? आम जनमानस कहता है कि यही महंगाई जब कांग्रेस की सरकारों में बढ़ती थी तब भाजपा के बड़े-बड़े नेता प्याज की माला एवं गैस सिलेंडर लेकर प्रदर्शन करते नजर आते थे! आज इन भाजपा के बड़े नेताओं की बोलती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने क्यों बंद है! आज भाजपा के कर्णधारों को एक गरीब आदमी की महंगाई से निकल रही आह क्यों नहीं सुनाई दे रही है? स्पष्ट है कि भाजपाई सत्ता के दंभ में अंधे हो चुके हैं ?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कई ऐतिहासिक काम किए हैं ।खासकर कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने जिस तरह से कदम उठाए हैं! उससे प्रदेश में संगठित अपराध बिल्कुल ध्वस्तीकरण के कगार पर पहुंच गया है? जिसका परिणाम यह है कि आज कई कंपनियां प्रदेश में निवेश भी कर चुकी है। कई आगे इसकी इच्छा बनाये है। कोरोना महामारी में भी योगी आदित्यनाथ ने जमकर प्रयास किए। भले ही दूसरी लहर के शुरुआती दौर में इससे प्रदेश को काफी मौतें झेलनी पड़ी हो? आम जनता का एक स्वभाव है वह बड़ी मुसीबत को बड़ी खुशियों को कुछ दिनों में भूल जाती है? लेकिन भोजन की थाली सुबह और शाम उसके सामने आती है! जब यह महंगाई का कष्ट देती है तो उसके मुंह से यही निकलता है कि प्रधानमंत्री जी योगी जी ठीक है लेकिन महंगाई महाखराब है? सच यह भी है कि आम जनता राजद्रोह अथवा देशद्रोह के मुक़दमे के दर्ज होने के डर से इस समय शांत बैठी है? विपक्ष के आंदोलनों में भी वह धार नहीं दिखाई देती जो महंगाई के विरुद्ध दिखाई देनी चाहिए? ले -देकर चाहे भाजपा हो या विपक्ष! राजनीति के हिंदू मुस्लिम ध्रुवीकरण अस्त्र तक पहुंच ही जाते हैं?
जरूरी है कि महंगाई पर देश स्तर पर बातचीत हो। यह भाजपा की सफलता थी कि उसने कांग्रेस की सरकार में ₹414 में मिलने वाले गैस सिलेंडर पर जमकर जनता के लिए आंदोलन किया। आज वही सिलेंडर लगभग घर पहुँचने तक ₹1000 का पड़ रहा है? पेट्रोल डीजल के दाम भी आसमान पर हैं। लेकिन फिर भी विपक्ष धारदार आंदोलन करने में विफल है। महंगाई आम आदमी की रसोई तक राक्षस बनकर प्रगट है! कहावत है कि भूखे पेट तो भजन भी नहीं हो सकता। ऐसे में जरूरी है कि देश में महंगाई घटे, खाद्य तेल सस्ते हो, दालें सस्ती हो। जिससे आम आदमी भरपेट भोजन कर सके। महंगाई का दानव मोदी सरकार से ज्यादा बड़ा आकार धारण कर चुका है। यदि इस पर लगाम ना लगी तो यह 2022 में भाजपा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है?
योगी आदित्यनाथ की छवि पूरे देश में एक आक्रामक मुख्यमंत्री के रूप में चर्चित हो रही है। चुनावो के दौरान योगी की जमकर प्रचार के लिए कई राज्यों में माँग भी रही है। कहीं ऐसा तो नहीं बेकाबू महंगाई पर कूटनीतिक सियासी कारणों से केंद्र सरकार द्वारा अंकुश न लगाया जा रहा हो? कुल मिलाकर महंगाई आक्रोश का एक बड़ा स्वरूप अख्तियार कर रही है! जिसे भाजपा को बारीकी से समझना ही होगा? क्योंकि जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में जनता का आक्रोश कहीं न कहीं सामने आया है! हां यह अलग बात थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष एवं प्रमुख पद के चुनाव में सत्ता की धमक से भाजपा ने अच्छी सफलता हासिल की? लेकिन सीधे जनता से जहां वोटिंग हुई वहां भाजपा को झटका लगा! स्पष्ट है कि महंगाई घरों में व्याप्त है। जहां ग्रहणी महिला का राज चलता है। और यहां से बढ़ता आक्रोश भाजपा के लिए घातक है???? तभी तो प्रधानमंत्री मोदी जी! योगी जी ठीक है लेकिन महंगाई महाखराब हैं??बड़ी दुःखदायी है???