कानपुर देहात अंकित तिवारी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कानपुर देहात स्थित अपने पैतृक गांव परौंख में हैं। हेलीकाप्टर से यहां उतरते ही सबसे पहले उन्होंने गांव की धरती को छूकर प्रणाम किया। इसके बाद गांव में अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए भावुक भी हुए। मंच से ही अपने दिल की बात कही। बोले, ‘मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के लोगों की यादें सदैव मेरे दिल में रहती है। मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहां से मुझे, आगे बढ़कर, देश-सेवा की हमेशा प्रेरणा मिलती रही।’

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यहां तक पहुंच पाऊंगा
महामहिम राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा, ‘मैंने सपने में भी कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के मेरे जैसे एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा। लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह कर के दिखा दिया।’

राष्ट्रपति ने कहा, ‘भारतीय संस्कृति में ‘मातृ देवो भव’, ‘पितृ देवो भव’, ‘आचार्य देवो भव’ की शिक्षा दी जाती है। हमारे घर में भी यही सीख दी जाती थी। माता-पिता और गुरु तथा बड़ों का सम्मान करना हमारी ग्रामीण संस्कृति में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है।’

उन्होंने कहा, ‘आज इस अवसर पर देश के स्वतंत्रता सेनानियों व संविधान-निर्माताओं के अमूल्य बलिदान व योगदान के लिए मैं उन्हें नमन करता हूं। सचमुच में, आज मैं जहां तक पहुंचा हूं उसका श्रेय इस गांव की मिट्टी और इस क्षेत्र तथा आप सब लोगों के स्नेह व आशीर्वाद को जाता है

मंदिर में माथा टेका
अभिनंदन समारोह में पहुंचने से पहले राष्ट्रपति कोविंद ने परिवार के साथ परौंख स्थित कुल देवी पथरी देवी के दर्शन किए। मंदिर के पुजारी केके वाजपेयी ने बताया कि राष्ट्रपति ने 11 हजार रुपए दान के रूप में दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी रहे राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और राज्यपाल पर फूलों की बारिश
महामहिम का काफिला जब मंदिर से उनके पुश्तैनी घर पहुंचा तब स्थानीय लोगों ने फूलों की बारिश करके उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की गाड़ियों पर भी पुष्पवर्षा की। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इसका जिक्र भी किया। कहा, जब गांव के लोग पुष्पवर्षा कर रहे थे तो राजपाल आनंदीबेन पटेल अचंभित रह गई, आनंदीबेन पटेल ने उनसे कहा कि यह मैंने पहली बार देखा है कि गांव वाले आपसे इतना प्यार करते है

प्राइमरी स्कूल पेड़ के नीचे और बहुत ही जीर्ण शीर्ण हालात में था। अब इसे मॉडल प्राइमरी स्कूल बना दिया गया है।

इसके अलावा राष्ट्रपति के पैतृक गांव परौंख में एक भी इंटर कॉलेज नहीं था। इसके चलते गांव के अधिकांश बच्चे 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे। गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए साल 2000 में राष्ट्रपति ने इंटर कॉलेज की नींव रखी थी। इसमें परौंख के साथ ही आस-पास के 500 से ज्यादा छात्र-छात्राएं मौजूदा समय में पढ़ाई करते हैं। यहां भी पहुंचकर राष्ट्रपति ने जायजा लिया।