कानपुर नि जनअवलोकन संवाददाता नारायण शुक्ला

सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह ने कहा कि मैंने नौबस्ता पुरानी मौरंग मंडी स्थित अस्पताल के लिए आरक्षित जमीन देखी है। कागज दिखवा रहा हूं। जमीन और अन्य आवासीय योजनाओं में अस्पतालों, औषधालय की जमीनें लेने के लिए केडीए को जल्द ही पत्र लिखूंगा।

केडीए की मनमानी से कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियों को झटका लगा है। मिलीभगत के खेल में प्राधिकरण के अफसरों ने कई आवासीय योजनाओं में अस्पताल और औषधालय के लिए आरक्षित जमीन प्लॉटिंग कर बेच डाली। इन जमीनों पर अस्पताल या औषधालय बन जाते तो कोरोना काल में हजारों शहरवासियों को इसका फायदा मिलता।

प्राधिकरण ने 13 आवासीय योजनाओं में अस्पतालों और

औषधालयों के लिए जमीन चिह्नित की थी। इनमें नौबस्ता बाईपास के पास साउथ सिटी का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी शामिल है। हालांकि, अभी तक एक भी योजना में अस्पताल नहीं बना, जिससे कुछ जमीन पर कब्जा भी हो गया है।

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Powered By PLAYSTREAMवर्ष-1970 में लागू मास्टर प्लान (1968-1991) के लिए धनराशि स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की थी। महायोजना-2021 में भी अस्पतालों के लिए 84 हेक्टेयर जमीन आरक्षित है। महायोजना में इसका उल्लेख भी है। इसके तहत केडीए ने नौबस्ता, सुजातगंज, दयानंद विहार-2, इंदिरानगर, जवाहरपुरम, जरौली फेज-2, यूपीयूडीपी गुजैनी, केयूडीपी बर्रा, डब्ल्यू ब्लॉक केशवनगर, लखनपुर समेत अन्य योजनाओं में अस्पतालों और औषधालयों के लिए 13 भूखंड आरक्षित किए थे।

केडीए ने बाद में इनमें से कुछ प्लॉट नर्सिंग होम के लिए बताकर टुकड़ों में बांटकर नीलाम कर दिए। तर्क दिया कि चिकित्सा विभाग इन्हें लेने नहीं आया। कुछ प्लॉट सफेदपोशों ने अपने चहेतों को दिलवा दिए, वह भी रिहायशी दर पर। इससे केडीए को भी चूना लगा।