कानपुर (नारायण शुक्ला)

अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने सीएमएम कोर्ट में तीनों की जमानत अर्जी पर पक्ष रखा लेकिन आपराधिक इतिहास और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने नारायण भदौरिया, गोपाल शरण व रॉकी यादव तीनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
पुलिस पर हमला कर अपराधी को भगाने का मामला
कानपुर में भाजपा पदाधिकारी के जन्मदिन समारोह में शामिल होने पहुंचे हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को पकड़ने गई पुलिस के साथ धक्का-मुक्की कर उसे भगाने के मामले में आरोपी भाजपा नेता व अधिवक्ता समेत तीन आरोपियों की जमानत अर्जी सोमवार को मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट शैलेंद्र यादव ने खारिज कर दी।

अब जमानत के लिए सेशन कोर्ट में अर्जी देनी होगी। वकीलों के भारी दबाव के बावजूद आरोपी अधिवक्ताओं की जेल से रिहाई संभव नहीं हो सकी। नौबस्ता स्थित आकर्षण गेस्ट हाउस में 2 जून की दोपहर भाजपा के पूर्व दक्षिण जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया का जन्मदिन समारोह मनाया जा रहा था।
इसमें पार्टी नेताओं के साथ कई अधिवक्ता मौजूद थे। पार्टी में बर्रा थाने का हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह भी पहुंचा था। जिसकी खबर पुलिस को लग

लग गई। नौबस्ता पुलिस ने दबिश देकर मनोज को गिरफ्तार कर लिया और जीप में बैठाकर थाने ले जाने लगी।

इसी बीच कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की व मारपीट कर मनोज को वहां से भगा दिया था। नौबस्ता पुलिस ने नारायण सिंह समेत 9 नामजद व 8-10 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी।
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अगले दिन मनोज सिंह को नौबस्ता से जबकि आरोपी नारायण भदौरिया, गोपाल चौहान व रॉकी यादव को नोएडा से गिरफ्तार किया गया था। नारायण सिंह और गोपाल शरण अधिवक्ता हैं। शनिवार को पुलिस को उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना था। दिनभर अधिवक्ताओं का हुजूम कचहरी के बाहर इकट्ठा रहा।

अनहोनी की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने रात लगभग 9:00 बजे तीनों को रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया था जहां तीनों की जमानत अर्जी भी दाखिल कर दी गई थी लेकिन अपराधिक इतिहास मंगाने के नाम पर अभियोजन ने समय मांगा था।

इस पर कोर्ट ने सोमवार की तारीख नियत कर दी थी। पुलिस ने तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में चौबेपुर स्थित अस्थाई जेल भेज दिया था। सोमवार सुबह से ही अधिवक्ता फिर कचहरी में इकट्ठा होने लगे। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने सीएमएम कोर्ट में तीनों की जमानत अर्जी पर पक्ष रखा लेकिन आपराधिक इतिहास और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने नारायण भदौरिया, गोपाल शरण व रॉकी यादव तीनों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।